हम आतंकवादी, गुंडे या माफिया नहीं, शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार: संजय सिंह
सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं के दौरान उन्होंने स्वयं दिल्ली पुलिस आयुक्त से लगातार संपर्क करने की कोशिश की, उन्हें बार-बार फोन किया और संदेश भेजे, लेकिन पुलिस आयुक्त ने न तो कॉल का उत्तर दिया और न ही कोई स्पष्टीकरण भेजा.
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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में संसदीय दल के नेता सांसद संजय सिंह ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा उनके साथ की गई लगातार बर्बरता, धक्का-मुक्की, घसीटने और जबरन हिरासत में लिए जाने के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है. सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) के माननीय सभापति श्री हरिवंश जी को दिल्ली के पुलिस आयुक्त और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ संसदीय विशेषाधिकार के हनन एवं सदन की अवमानना (Breach of Parliamentary Privilege and Contempt of the House) का औपचारिक नोटिस एवं पूरक नोटिस सौंपा है. उन्होंने दो टूक कहा कि एक मौजूदा सांसद के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने और उनके साथ हिंसक आचरण करने के मामले में पुलिस आयुक्त की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
मौजूदा सांसद के साथ बर्बरता और विशेषाधिकार का खुला हनन: 11 दिनों में 3 बार शारीरिक बल प्रयोग
विशेषाधिकार समिति को सौंपे गए नोटिस में सांसद संजय सिंह ने प्रमुखता से रेखांकित किया कि पिछले मात्र 11 दिनों के भीतर एक मौजूदा सांसद के विरुद्ध तीन बार अत्यधिक शारीरिक बल का प्रयोग किया गया, जो किसी नियमित पुलिस कार्रवाई का हिस्सा नहीं बल्कि लोकतंत्र और संसद की गरिमा का खुला अनादर है:
2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती): मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के विरोध में जंतर-मंतर की ओर निकाले जा रहे शांतिपूर्ण मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने सांसद संजय सिंह के साथ धक्का-मुक्की की, उन्हें अपमानजनक तरीके से सड़क पर गिराया, घसीटा और जबरन पुलिस बस में ठूंस दिया.
10 अक्टूबर 2026: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध के दौरान पार्टी नेताओं के साथ बाहर निकलते ही पुलिसकर्मियों ने उन्हें सामान्य रूप से चलने तक नहीं दिया और बलपूर्वक घसीटते हुए बस में डालकर हिरासत में लिया.
12 अक्टूबर 2026: जनपथ मेट्रो स्टेशन, संसद मार्ग और जंतर-मंतर क्षेत्र के समीप मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भारी गड़बड़ी के विरोध में आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस ने फिर से उनके साथ क्रूरता बरती. उन्हें ज़ोर से घसीटा गया, गर्दन पकड़कर खींचा गया और धक्का देकर बस में ठूंसते हुए हिरासत में लिया गया.
संजय सिंह ने नोटिस में स्पष्ट किया कि एक जन प्रतिनिधि को इस प्रकार घसीटना, जमीन पर पटकना और बलपूर्वक बस में धकेलना विशेषाधिकार हनन का गंभीर मामला है, जिसे सामान्य पुलिस व्यवस्था की आड़ में कतई खारिज नहीं किया जा सकता.
हम आतंकवादी या गुंडे नहीं, शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार: संजय सिंह
सोशल मीडिया के जरिए जारी अपने वीडियो संदेश में सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मोदी जी! हम लोग कोई आतंकवादी नहीं हैं, गुंडे नहीं हैं, माफिया नहीं हैं. हम देश की सर्वोच्च संसद के सदस्य हैं. संसद सदस्य होने के नाते हमारा यह संवैधानिक दायित्व भी है और भारत का नागरिक होने के नाते यह हमारा मौलिक अधिकार भी है कि हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाएं. लोकतंत्र को बचाने, वोट चोरी के खिलाफ और अत्याचार-जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार हमें किसी की कृपा से नहीं मिला है; यह अधिकार क्रांतिकारियों और महापुरुषों के बलिदान की बदौलत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी द्वारा लिखे गए संविधान ने दिया है.”
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने फोन उठाया न मैसेज का जवाब दिया; दोषी पुलिसकर्मियों पर दर्ज होगी FIR
सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं के दौरान उन्होंने स्वयं दिल्ली पुलिस आयुक्त से लगातार संपर्क करने की कोशिश की, उन्हें बार-बार फोन किया और संदेश भेजे, लेकिन पुलिस आयुक्त ने न तो कॉल का उत्तर दिया और न ही कोई स्पष्टीकरण भेजा. उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त अपने बल के प्रमुख हैं, इसलिए इस पूरी बर्बरता की जिम्मेदारी सीधे उन पर आती है.संजय सिंह ने कहा कि जाफ़रपुर कलां थाने के एसएचओ और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों ने जिस तरह का तानाशाही और बर्बर रवैया अपनाया है, उसके खिलाफ वे चुप बैठने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा, “इस मामले में विशेषाधिकार समिति फैसला करेगी और साथ ही बर्बरता करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. यदि पुलिस अपने ही अफसरों के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखेगी, तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कोर्ट से आदेश करवाकर इनके खिलाफ कार्रवाई कराएंगे.”
महिला पत्रकारों, छात्राओं और कार्यकर्ताओं की अवैध हिरासत; BNSS 2023 के सुरक्षा नियमों की उड़ीं धज्जियां
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सांसद संजय सिंह ने विशेषाधिकार समिति को दिए नोटिस में पुलिस द्वारा महिलाओं के साथ किए गए अमानवीय और गैरकानूनी बर्ताव को भी पूरी तथ्यात्मकता के साथ दर्ज कराया है. नोटिस के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को जब उन्हें जाफ़रपुर कलां थाने ले जाया गया, तो वहां बड़ी संख्या में महिला पत्रकारों, छात्राओं और महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा गया था.संजय सिंह ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष तत्काल हस्तक्षेप कर महिलाओं की हिरासत को नियंत्रित करने वाले कानूनी सुरक्षा उपायों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बावजूद उन्हें देर शाम तक अवैध रूप से थाने में रोके रखा गया. नोटिस में मांग की गई है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिलाओं की गिरफ्तारी पर लागू कानूनी सुरक्षा उपायों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच हो तथा पुलिस आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा जाए कि किस कानूनी प्राधिकार, आधार और अवधि के तहत महिला प्रदर्शनकारियों को शाम तक थाने में बंधक बनाकर रखा गया था.