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21 गांव के लिए भिड़ गये देश के दो राज्य, आखिर क्या है ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया विवाद?; नवीन पटनायक ने CM माझी को लिखा पत्र

ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा विवाद को लेकर बीजेपी और बीजेडी आमने-सामने हैं. नवीन पटनायक ने बीजेपी पर राजनीतिक कारणों से चुप्पी साधने का आरोप लगाया, जबकि मंत्री सुरेश पुजारी ने पिछली बीजेडी सरकार को विवाद बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया. कोटिया पंचायत के 28 में से 21 गांवों पर दोनों राज्य दावा करते हैं.

21 गांव के लिए भिड़ गये देश के दो राज्य, आखिर क्या है ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया विवाद?; नवीन पटनायक ने CM माझी को लिखा पत्र
Image Source: IANS
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया ग्राम पंचायत को लेकर लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बीजू जनता दल (बीजेडी) आमने-सामने हैं. पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा की बीजेपी सरकार पर इस मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाया है. वहीं, राज्य के मंत्री सुरेश पुजारी ने पलटवार करते हुए पिछली बीजेडी सरकार को विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया है.

क्या है कोटिया विवाद?

ओडिशा के कोरापुट जिले में स्थित कोटिया ग्राम पंचायत के 28 गांवों में से 21 पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश, दोनों अपना दावा करते हैं. यह विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अधिकार, चुनाव और स्थानीय लोगों की पहचान से भी जुड़ा हुआ है. दोनों राज्यों के दावों के बीच यहां रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था का सवाल भी अहम बना हुआ है. फिलहाल कोटिया पंचायत के प्रशासनिक काम ओडिशा के कोरापुट जिले के तहत होते हैं. इसके बावजूद कुछ गांवों को लेकर आंध्र प्रदेश की गतिविधियां समय-समय पर विवाद को हवा देती रही हैं.

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तीन गांवों में चुनाव की अधिसूचना से बढ़ा विवाद

हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने कोटिया पंचायत के फागुनासिनेरी, गंजेईपादार और फाटुसिनेरी गांवों में चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की. ये गांव ओडिशा के पोट्टांगी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. आंध्र प्रदेश का कहना है कि इन गांवों के कुछ मतदाताओं के पास उसके वोटर कार्ड हैं और वे सलूर तथा अरकु विधानसभा क्षेत्रों में मतदान करते हैं.  इस कदम के बाद ओडिशा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई. विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर मामले पर चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार को तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का समर्थन प्राप्त होने के कारण बीजेपी इस विवाद पर सख्त रुख नहीं अपना रही है.

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बीजेपी का जवाब

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नवीन पटनायक के आरोपों पर ओडिशा के मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अपनी सरकार की गलतियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. उनके मुताबिक, पिछली बीजेडी सरकार के दौरान सीमा विवाद का प्रभावी समाधान नहीं निकल पाया, जिससे स्थिति और जटिल हुई. पुजारी ने दावा किया कि मौजूदा बीजेपी सरकार विवाद सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में वह चार बार कोटिया का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने पटनायक के प्रति सम्मान जताते हुए यह भी कहा कि उनका पत्र समाधान के लिए ठोस सुझाव देने के बजाय राजनीतिक चर्चा में बने रहने की कोशिश है.

दशकों पुराना है कोटिया सीमा विवाद

कोटिया विवाद वर्ष 1968 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. अदालत ने दोनों राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था. वर्ष 2006 में अदालत ने कहा कि राज्यों के बीच सीमा विवादों के समाधान के लिए संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. बाद में ओडिशा सरकार ने जनवरी 2022 में नई याचिका दायर की. यह मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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बता दें कि कोटिया विवाद का अंतिम समाधान निकलना बाकी है. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि दोनों राज्यों के दावों के बीच स्थानीय लोगों के प्रशासनिक अधिकार और हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित होगी.

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