तारीक रहमान के नुमाइंदे का गुप्त दिल्ली दौरा, अजीत डोभाल और RAW प्रमुख से मीटिंग, पाकिस्तान के मंसूबों पर फिरा पानी!

बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद, भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा के मोर्चे पर पहली कूटनितिक पहल हुई है, जिसे पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.

बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार देखने को मिल रहे हैं. इससे पहले, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे. यूनुस सरकार का चीन और पाकिस्तान की तरफ ज्यादा झुकाव था. बांग्लादेश में कंट्टरपंथी ताकतें अपने पैर फैला रही थीं. अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार चरम पर थे, लेकिन नई सरकार बनने के बाद अब ऐसा लगता है कि बांग्लादेश फिर से भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर करना चाहता है.

भारत-बांग्लादेश के बीच सुरक्षा के मोर्चे पर पहली कूटनीतिक पहल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी के प्रमुख मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में एक गोपनीय यात्रा पर नई दिल्ली का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, रॉ (RAW) प्रमुख पराग जैन और मिलिट्री इंटेलिजेंस के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल आरएस रमन के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं. इन बैठकों को कई मायनों में बहुत ही अहम माना जा रहा है. आपको बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना को पीएम की कुर्सी से हटा दिया गया था, उसके बाद शेख हसीना ढाका से सीधा दिल्ली पहुंची और फिलहाल दिल्ली में शरण ली हुईं है. तब से लेकर अभी तक भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव रहा लेकिन नई सरकार के बहाल होने के बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा स्तर पर यह पहली अहम कूटनीतिक पहल है. इसलिए भी इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

दोनों देशों के बीच हुई बड़ी डील

आपको बता दें कि 22 फरवरी को डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) का प्रमुख बनने के बाद, तारिक रहमान सरकार द्वारा किए गए बदलावों के तहत मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी ने कार्यभार संभाला. नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद उनका दिल्ली पहुंचना और भारतीय सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात करना रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस दौरे को गोपनीय ही रखा गया और बांग्लादेश में इसे 'मेडिकल टूर' का नाम दिया गया, जबकि दिल्ली में रॉ प्रमुख ने उनके सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन भी किया. इस मुलाकात में जो चर्चाएं हुईं, उनका मुख्य केंद्र यह था कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी तीसरे के लिए नहीं होने देंगे.

पाकिस्तान को लगा झटका

भारत में कुछ अच्छा हो और पड़ोसी देश पाकिस्तान के पेट में दर्द न हो, ये कैसे हो सकता है? पाकिस्तान हमेशा हर मोर्चे पर भारत को पछाड़ने की फिराक में रहता है. बांग्लादेश में यूनुस सरकार के दौरान पाकिस्तान बहुत खुश था, क्योंकि तब बांग्लादेश का झुकाव भारत को छोड़कर पाकिस्तान और चीन की तरफ हो गया था. लेकिन जैसे ही नई सरकार बनी, तो बांग्लादेश अपने पुराने अंदाज में आ गया और संबंधों में आई खाई को फिर से पाटने की कोशिश में लग गया. ये देखकर पाकिस्तान सरकार की रणनीति को करारा झटका लगा है.

पाकिस्तान का नापाक मंसूबा हो गया फेल!

दरअसल, तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार का रुख पाकिस्तान की उम्मीदों के विपरीत साबित हो रहा है. 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटे रहमान ने चुनावों में भारी जीत हासिल की और 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. प्रधानमंत्री बनते ही तारीक रहमान का झुकाव फिर से भारत की ओर है. वे भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही देशों में ऐसे ही तालमेल अगर बना रहा, तो यह पाकिस्तान के उन प्रयासों को विफल कर देगा, जिसमें वह बांग्लादेश का इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक नए मोर्चे के तौर पर करना चाहता था. 

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