Advertisement
विजयादशमी पर PM मोदी का देशवासियों को संदेश, संस्कृत श्लोक साझा कर किया प्रभु श्रीराम का गुणगान
Dussehra 2026: पीएम की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, "आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं. उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे. सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है."
Advertisement
Dussehra 2026: पीएम की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, "आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं. उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे. सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है."
पीएम मोदी ने साझा किया भगवान श्रीराम की स्तुति वाला संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक और पोस्ट में संस्कृत सुभाषित साझा किया है. पीएम की ओर से संस्कृत श्लोक, "रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः.. राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥" शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि भगवान श्रीराम साक्षात् धर्म के जीवंत स्वरूप हैं.. वे सज्जनों के परम आश्रय, सत्यसंकल्प एवं सत्यपराक्रमी हैं; वे इस संपूर्ण विश्व के ऐसे एकमात्र शासक हैं, जो समस्त लोकों का ठीक उसी प्रकार पालन और रक्षण करते हैं, जैसे देवराज इंद्र संपूर्ण देवलोक के अधिपति और रक्षक हैं.
रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः। राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥ https://t.co/up7GplXzTg
— Narendra Modi (@narendramodi) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 20, 2026Advertisement
Loading Ad...
वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड से लिया गया है श्लोक
Advertisement
प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की ओर से रचित 'वाल्मीकि रामायण' के अरण्यकांड के 37वें सर्ग का 13वां श्लोक शेयर किया है. इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र, गुणों और उनके प्रभाव का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है.
जब राक्षस ऋषियों और वनों में रहने वाले साधु-संतों पर अत्याचार कर रहे थे, तब श्रीराम ने उनके दुखों को दूर करने और धर्म की स्थापना करने का संकल्प लिया था। इस प्रसंग में श्रीराम के स्वरूप को धर्म के साक्षात साकार रूप के रूप में चित्रित किया गया है.
'पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा’, फ्रांस में हिंसा पर ट्रंप का बड़ा बयान, मैक्रों को दी नसीहत
Advertisement
श्रीराम के जीवन में धर्म का महत्व
इस श्लोक का भावार्थ है कि धर्म केवल कोई अमूर्त नियम या सिद्धांत नहीं है, बल्कि श्रीराम के आचरण, उनके वचनों और उनके जीवन में धर्म शरीर धारण करके प्रकट हुआ है. वे जीवन की हर परिस्थिति (चाहे पुत्र के रूप में, भाई के रूप में, मित्र के रूप में या राजा के रूप में) में धर्म का ही पालन करते हैं.
इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि जिस प्रकार देवराज इंद्र संपूर्ण देवलोक का नेतृत्व और रक्षा करते हैं, उसी प्रकार प्रभु श्रीराम इस समस्त चराचर जगत के स्वामी और रक्षक (राजाधिराज) है.. उनका आधिपत्य किसी भय या बल से नहीं, बल्कि उनके धर्मयुक्त शासन से है..
Advertisement
INPUT - IANS
यह भी पढ़ें