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अखिलेश के गढ़ कन्नौज में PDA सम्मेलन फ्लॉप, खाली रहीं कुर्सियां, नहीं जुटी 100 लोगों की भीड़, सपा की कमेटी भंग

अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में आयोजित PDA सम्मेलन फ्लॉप रहा. यहां पार्टी 100 लोगों की भीड़ भी नहीं जुटा पाई. ये अखिलेश का गढ़ है. इसी बीच अखिलेश ने जिला कमेटी भंग कर दी है.

Image Source: X/ @asim_arun
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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव के घर कन्नौज से सपा के लिए बुरी ख़बर सामने आ रही है. यहाँ अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बुलाया गया PDA सम्मेलन बुरी तरह फ्लॉप रहा. मामला इतना बढ़ गया कि सपा अध्यक्ष के नाते अखिलेश को कन्नौज की पूरी यूनिट भंग करनी पड़ी. सपाइयों ने एक तरह से बता दिया कि उनके लिए अखिलेश ही सपा हैं, सपा ही अखिलेश हैं, इसलिए अगर अखिलेश से सीधे बात हो जाए, काम हो जाए, तो किसी और नेता की क्या हैसियत?

भले वो प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल के कद और पद का व्यक्ति ही क्यों न हो. इसलिए तो उनकी ओर से कन्नौज के सपा कार्यालय में बुलाए गए कार्यक्रम में मंच तो था, मंच पर खचाखच नेता भी बैठे थे, नीचे कुर्सियां भी खूब सारी थीं, लेकिन उस पर कार्यकर्ता, मंच पर बैठे नेताओं जितने भी नहीं थे. यानी कि न नेताओं ने आम सपा कार्यकर्ताओं से संपर्क साधा और न ही आम सपाइयों ने कार्यक्रम में आना उचित समझा.

इसके दो ही निष्कर्ष निकलते हैं. पहला तो यह कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष की कोई हैसियत नहीं है और सपाइयों के लिए अखिलेश के प्रति ही दीवानगी है, न कि सपा के लिए. दूसरा यह कि कन्नौज सपा में गुटबाजी चरम पर है, इसलिए किसी ने आम कार्यकर्ता से संपर्क साधने की जहमत नहीं उठाई. ये खाली कुर्सियां कहीं यूपी विधानसभा और सत्ता की कुर्सी तक सपा की दूरी और न बढ़ा दें.

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सपा के कार्यक्रम में मंच पर खचाखच भीड़, नीचे पसरा सन्नाटा!

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आपको बताएं कि श्याम लाल पाल की ओर से बुलाए गए इस फ्लॉप कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. बीजेपी खूब चुटकियां ले रही है. इस वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि कन्नौज जिले के बाकी नेता और पदाधिकारी तो मंच पर बैठे हैं, लेकिन मंच के सामने लगी कुर्सियां खाली थीं. यानी जितने लोग मंच पर थे, उससे आधे भी इस कार्यक्रम में कुर्सियों पर नहीं बैठे थे.

इसके बाद जैसे ही वीडियो और PDA कार्यकर्ता सम्मेलन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, हड़कंप मच गया. बीजेपी पर तंज कसने वाली सपा को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा. वो भी अखिलेश के दिल के करीब कन्नौज में. यह न सिर्फ अखिलेश का गढ़ है, बल्कि उनके लिए बेहद खास है. वो इसलिए कि इसी संसदीय क्षेत्र से अखिलेश और डिंपल यादव ने अपनी संसदीय पारी का आग़ाज़ किया था और सपा अध्यक्ष ही यहां के मौजूदा सांसद हैं. ऐसे में जिले से आई इस तस्वीर ने सबको हिलाकर रख दिया.

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कन्नौज में सपा के कार्यक्रम में खाली रहीं कुर्सियां!

ऐसे में खाली कुर्सियों और PDA सम्मेलन का फ्लॉप होना काफी बड़ी बात थी. अखिलेश को संदेश देना जरूरी था कि पार्टी से बड़ी कोई चीज नहीं. यहां के कुछ कार्यकर्ता जो दूसरे जिलों के कार्यकर्ताओं से खुद को थोड़ा विशेष मानते हैं, उन्हें भी मैसेज देना जरूरी था कि पार्टी में अनुशासन जरूरी है, उससे हटेंगे तो एक्शन होगा. राजनीति के जानकार मानते हैं कि अखिलेश यादव के वहां से सांसद होने के नाते ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता अखिलेश यादव से डायरेक्ट टच में होते हैं, इसलिए जिला कमेटी और दूसरे नेताओं को तो तवज्जो ही नहीं दी जाती. इसी का नतीजा है कि यह कार्यक्रम फेल साबित हो गया.

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कन्नौज में फ्लॉप साबित हुआ सपा का PDA सम्मेलन

जानकारों का कहना है कि कन्नौज या दूसरे जिलों के कार्यकर्ताओं के लिए भी अखिलेश यादव ही समाजवादी पार्टी हैं. इसी कारण से जब प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल PDA कार्यकर्ता सम्मेलन करने पहुंचते हैं, तो उन्हें हल्के में लिया जाता है, कार्यक्रम को तवज्जो नहीं दी जाती है. यही कुछ इस बार भी हुआ. नेता खुद तो कार्यक्रम में पहुंचकर मंच पर बैठ गए, लेकिन आम लोगों और कार्यकर्ताओं को जुटाने की कोई कोशिश तक नहीं की गई. इसी कारण पार्टी की खूब किरकिरी हो रही है. इससे खफा पार्टी ने तत्काल न सिर्फ कन्नौज की पूरी पार्टी इकाई भंग कर दी, बल्कि कन्नौज से जितने नेता अलग-अलग पार्टी के पदों पर मौजूद हैं, सबकी छुट्टी कर दी गई. बीजेपी के नेताओं ने कन्नौज के इस वीडियो को हाथों-हाथ लिया और सभी यह कहने लगे कि अखिलेश यादव के लिए PDA तो सिर्फ जुमला है, PDA की जनता तो हमारे साथ है.

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'अखिलेश का पीडीए सिर्फ सत्ता की सीढ़ी'

इसी बीच उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर सोमवार को तगड़ा राजनीतिक प्रहार किया. असीम अरुण ने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को महज एक चुनावी ढोंग करार दिया.

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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव का यह नारा जनकल्याण के लिए नहीं, बल्कि केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का जरिया भर है. कन्नौज की जनता ने अखिलेश यादव को सांसद चुनकर बड़ी भूल कर दी है. ढाई साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन वह एक रात भी अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं ठहरे. वह सिर्फ रस्म अदायगी के लिए आते हैं. एक्सप्रेसवे पर गाड़ी रोककर चंद कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और लखनऊ लौट जाते हैं.

कन्नौज की जनता से हुई बड़ी चूक: असीम अरुण

कन्नौज में सपा के पीडीए सम्मेलन में पसरे सन्नाटे और खाली कुर्सियों के चलते जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने पर मंत्री असीम अरुण ने चुटकी ली. उन्होंने कहा कि कन्नौज सम्मेलन की तस्वीरें सपा के जमीनी जनाधार का असली आईना हैं. कार्यकर्ताओं की गैर-मौजूदगी और जनता की बेरुखी कोई अप्रत्याशित बात नहीं है. जो बिखराव आज कन्नौज में दिख रहा है, वही पूरे प्रदेश में सपा की वास्तविक स्थिति है.

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असीम अरुण ने सवाल उठाया कि चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को पीडीए की याद सताने लगती है, लेकिन उनका असली एजेंडा क्या है? उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री तो बनना चाहते हैं, पर यह नहीं बताते कि कुर्सी पाकर वे करेंगे क्या? कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और भ्रष्टाचार जैसे बुनियादी मसलों पर उनके मुंह में ताला लग जाता है. महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर वे हमेशा मौन साध लेते हैं.

असीम अरुण ने अखिलेश के पीडीए सम्मेलन पर कसा तंज

उन्होंने कहा कि जिस दल का न कोई स्पष्ट विजन है और न ठोस नीति, जिसका एकमात्र ध्येय सिर्फ अपने परिवार को सत्ता की मलाई खिलाना हो, उसकी ऐसी ही दुर्दशा तय है. उन्होंने सपा को वैचारिक रूप से खोखला बताते हुए कहा कि यह दल नीति और नैतिकता दोनों ही पैमानों पर पूरी तरह दिवालिया हो चुका है.

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सपा की राजनीति के उलट भाजपा के कामकाज को रेखांकित करते हुए असीम अरुण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन की सरकार में भारतीय जनता पार्टी विकास के नए प्रतिमान गढ़ रही है. भाजपा लोक-कल्याणकारी नीतियों और उच्च राजनीतिक नैतिकता की बुनियाद पर जनता के भरोसे के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है. सपा जैसे विपक्षी दल सिर्फ अवसरवादी नारों के सहारे अपनी सियासी जमीन तलाशने के लिए परेशान हैं.

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