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'मैं छोटा हूं, आप सब बड़े...', आखिर मोरारी बापू ने क्यों मांगी माफी? जानिए क्या है सूतक काल में दर्शन और कथा पर हुआ विवाद

प्रसिद्ध रामकथाकार मोरारी बापू के खिलाफ बनारस में आक्रोश है. दरअसल अपने बनारस दौरे के दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के साथ-साथ राम कथा भी की था. इस वक्त वो सूतक काल में थे. हालाँकि उन्होंने मांफी मांगी है.

प्रसिद्ध रामकथाकार मोरारी बापू एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार मामला धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है. दरअसल, मोरारी बापू हाल ही में काशी पहुंचे थे, जहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए थे. यहां राम कथा का भी आयोजन किया गया था. लेकिन ये सब उस समय हुआ जब वे सूतक काल में थे. उनकी पत्नी के निधन के दो दिन बाद ही उन्होंने ये धार्मिक गतिविधियां की. इसी को लेटकर विवाद छिड़ा हुआ है. बनारस के संतों और श्रद्धालुओं में इस आयोजन को लेकर गहरी नाराजगी जताई है.

मोरारी बापू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
संतों और धार्मिक संगठनों का कहना था कि किसी परिजन के निधन के बाद सूतक (शुद्धिकरण की अवधि) माना जाता है, जिसमें मंदिरों में प्रवेश और धार्मिक अनुष्ठान करना वर्जित होता है. इसी आक्रोश में डूबे संत समाज के लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने बनारस के अस्सी घाट और गोदौलिया इलाके में विरोध प्रदर्शन कर मोरारी बापू का पुतला दहन भी किया गया.

मोरारी बापू ने मांगी माफी
हालांकि, इस पूरे विवाद पर मोरारी बापू ने सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगते हुए कहा, “अगर किसी को बुरा लगा हो तो मैं क्षमा चाहता हूं.” उन्होंने यह भी कहा, “मैं छोटा हूं, आप सब बड़े हैं, बड़ों को क्षमा कर देना चाहिए.”

बता दें कि 12 जून को मोरारी बापू की पत्नी का निधन हुआ था. इसके तुरंत बाद 14 जून को वे काशी पहुंचे और दर्शन-पूजन के साथ कथा भी की. इसी दौरान सूतक की बात उठी. संत समाज और कई लोगों का कहना है कि यह धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है.

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