PM मोदी के कार्यक्रम में नहीं दिखे, दिल्ली भी नहीं पहुंचे... क्या कांग्रेस छोड़ेंगे शशि थरूर, जानें क्यों उठ रहे सवाल
केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक में शशि थरूर शामिल नहीं हुए. उनके अनुपस्थित रहने से पार्टी में चर्चा शुरू हो गई कि वे राहुल गांधी से नाराज हैं. हालांकि सूत्रों ने कहा कि थरूर ने पहले ही अनुमति ली थी और वह अपने तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में मौजूद रहना चाहते थे.
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कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सांसद और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले नेता शशि थरूर को लेकर बीते कई महीनों से पार्टी के भीतर असहजता की स्थिति बनती और फिर संभलती रही है. लेकिन हालिया घटनाक्रम को देखते हुए यह सवाल अब और गहराता जा रहा है कि क्या शशि थरूर और कांग्रेस के रास्ते अब अलग होने वाले हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि या तो थरूर खुद पार्टी छोड़ने का फैसला कर सकते हैं, या फिर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें किनारे करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.
दरअसल, इस अटकल को बल तब मिला जब केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दिल्ली में बुलाई गई कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक में शशि थरूर शामिल नहीं हुए. उनकी गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया. कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह बात फैल गई कि थरूर, राहुल गांधी से नाराज हैं और उन्हें पार्टी में अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है. हालांकि बाद में कांग्रेस सूत्रों ने सफाई देते हुए कहा कि शशि थरूर ने बैठक में शामिल न होने के लिए पहले ही अनुमति ले ली थी. सूत्रों के मुताबिक, थरूर अपने संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम में मौजूद रहना चाहते थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम निर्धारित था. बताया गया कि इसी वजह से वह दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं हो सके.
PM मोदी के कार्यक्रम में भी नहीं शामिल हुए थरूर
गौर करने वाली बात यह भी रही कि शशि थरूर प्रधानमंत्री मोदी के किसी भी कार्यक्रम में मंच साझा करते या उसमें शामिल होते नजर नहीं आए. फिर भी, उनका अपने क्षेत्र में मौजूद रहना और दिल्ली की अहम बैठक से दूरी बनाए रखना, पार्टी के भीतर कई सवाल खड़े कर गया. दरअसल, शशि थरूर की नाराजगी की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इससे पहले कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की एक महापंचायत के दौरान भी स्थिति असहज हो गई थी. उस कार्यक्रम में राहुल गांधी मौजूद थे और थरूर को लेकर यह चर्चा सामने आई कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर अपमानित महसूस हुआ. बताया गया कि मंच पर बैठने की व्यवस्था और वक्ताओं के क्रम को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई थी.
क्यों नाराज हुए थरूर?
सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर से कहा गया था कि उनके बाद केवल राहुल गांधी ही भाषण देंगे, लेकिन बाद में कई अन्य नेताओं ने भी संबोधन किया. इसे थरूर की वरिष्ठता और पार्टी में उनके कद के लिहाज से प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना गया. इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई. इतना ही नहीं, महापंचायत के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में शशि थरूर का नाम तक नहीं लिया. पार्टी के भीतर इस बात को गंभीरता से नोट किया गया. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच वरिष्ठ नेताओं के सम्मान, आंतरिक अनुशासन और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर बहस छिड़ गई. पार्टी की ओर से शशि थरूर की कथित नाराजगी या उनकी बैठक में अनुपस्थिति को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि कांग्रेस सूत्र लगातार यही दोहराते रहे हैं कि थरूर ने हाईकमान से अनुमति लेकर ही बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. इसके बावजूद, सवाल यह बना हुआ है कि क्या यह सब केवल संयोग है या फिर कांग्रेस के भीतर कुछ गहरे मतभेद पनप रहे हैं.
PM मोदी ने साधा कांग्रेस पर निशाना
इसी बीच केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों पर तीखा हमला बोला. तिरुवनंतपुरम में पीएम मोदी ने विशाल रोड शो किया और कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया. उन्होंने पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया और एक लाख से अधिक लाभार्थियों को ऋण वितरित किए. इसके अलावा तीन अमृत भारत एक्सप्रेस समेत चार नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई. जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस और वामपंथी दलों को घेरा और केरल की जनता से आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए को मौका देने की अपील की. अपने भाषण के अंत में उन्होंने अंग्रेजी में कहा, अब वक्त है विकसित केरल का, अब वक्त है एनडीए सरकार का.
बहरहाल, कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि शशि थरूर को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक बहस का विषय बन चुकी है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह असहजता महज एक राजनीतिक घटना थी या फिर कांग्रेस के लिए एक बड़े बदलाव की आहट.
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