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CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बड़ी राहत, SEM कोर्ट ने दिए रिहाई के आदेश, दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज

CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को SEM कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने दोनों को करीब 1.5 घंटे की सुनवाई के बाद जमानत दे दी है. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों की तीन दिन की हिरासत और बढ़ाने की दिल्ली पुलिस की मांग खारिज कर दी.

Image Source- IANS
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को SEM कोर्ट ने राहत प्रदान की है. कोर्ट ने बुधवार को सीजेपी के दोनों नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया है. उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत के बाद एसईएम कोर्ट के सामने पेश किया गया था.

आशुतोष रांका को SEM कोर्ट ने दी जमानत

इससे पहले कोर्ट ने उनसे जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि दिल्ली पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत को तीन दिन बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने उनको रिहा करने का आदेश सुनाया.

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इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को बुधवार को वापस ले लिया. विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की कोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सौरव और आशुतोष दिल्ली हाईकोर्ट गए थे.

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दिल्ली हाईकोर्ट में आशुतोष रांका और सौरव दास की उम्र का हुआ जिक्र!

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र का जिक्र हुआ. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रंका 31 साल के हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "तो ये जेन-जी नहीं हैं." जज ने यह भी पूछा कि 'मिलेनियल्स' और 'जेन-जी' की उम्र का दायरा क्या है?

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हाई कोर्ट में क्या हुआ?

सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका होती है, तो आप कौन हैं, क्या करते हैं, और आपकी मंशा क्या है? ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं. विरोध करने का अधिकार है, इसमें कोई संदेह नहीं. लेकिन जब मजिस्ट्रेट शांति भंग होने की आशंका पर विचार करता है, तो ये सभी सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

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कोर्ट ने कहा कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे और छात्र शामिल थे. अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है. लोग वही हैं, लेकिन उनकी मांग और प्रदर्शन का उद्देश्य बदल गया है. इसलिए यह सवाल भी अहम हो जाता है कि आप असल में कौन हैं और आपकी पहचान क्या है? आपका संगठन क्या है? उसका असली मकसद क्या है? कोर्ट ने आगे कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका हो, तो इन सभी सवालों का महत्व बढ़ जाता है.

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