20 साल बाद उद्धव-राज ठाकरे के साथ आने की जानें इनसाइड स्टोरी

महाराष्ट्र में 20 साल के बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे राजनीतिक मंच साझा करेंगे. हिंदी भाषा के विरोध में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का साथ देते हुए संयुक्त मार्च का ऐलान किया है.

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27 Jun 2025
( Updated: 08 Dec 2025
04:17 AM )
20 साल बाद उद्धव-राज ठाकरे के साथ आने की जानें इनसाइड स्टोरी

महाराष्ट्र में 20 साल के बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे राजनीतिक मंच साझा करेंगे. हिंदी भाषा के विरोध में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का साथ देते हुए संयुक्त मार्च का ऐलान किया है. इस फैसले की जानकारी शिवसेना-यूबीटी के नेता संजय राउत की तरफ से दी गई. फिलहाल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने संयुक्त मार्च को लेकर बनी सहमति के बारे में बताया है.

मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा, "राज ठाकरे ने सामने आकर संजय राउत को फोन किया. उन्होंने एक ही मार्च निकालने के लिए कहा. मार्च की तारीख को लेकर मतभेद जरूर था, उसे दूर कर 5 जुलाई को मार्च निकालने पर सहमति बनी है."

मराठी गौरव के लिए 5 जुलाई की रैली

देशपांडे ने कहा कि 5 जुलाई की रैली मराठी गौरव के लिए है, राज या उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नहीं. उन्होंने कहा, "ये जो संयुक्त मार्च 5 जुलाई को निकलने वाला है, ये न तो राज ठाकरे का मार्च है और न ही उद्धव ठाकरे का है. ये मार्च मराठी मानुष का है। इसे संयुक्त महाराष्ट्र की लड़ाई पार्ट-2 कहेंगे."

महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का फैसला लिया था. सबसे पहले राज ठाकरे ने फैसले का विरोध शुरू किया. गुरुवार को उन्होंने 7 जुलाई को मुंबई में मार्च निकालने की घोषणा की. उसके बाद उद्धव ठाकरे की तरफ से उस मार्च को समर्थन दिया गया. हालांकि, साथ ही उद्धव ठाकरे ने 7 जुलाई को अपना आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया.

इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों का एकजुट मार्च होगा. 5 जुलाई को दोनों नेता संयुक्त मार्च करेंगे.

उत्तर भारतीय वोट हासिल करने के लिए बीजेपी कर रही राजनीतिकरण 

संयुक्त मार्च पर मनसे नेता देशपांडे ने कहा कि जब-जब मराठी भाषा पर आक्रमण होगा, तब-तब सभी मराठी एक साथ आकर सबक सिखाएंगे. इस तरह का संदेश देशभर में जाना चाहिए.

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उन्होंने बीजेपी पर उत्तर भारतीय वोट हासिल करने के लिए हिंदी-मराठी मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है. देशपांडे ने कहा, "बीजेपी को राजनीति करने की आदत है. हिंदी-मराठी भाषा विवाद निकाला किसने? उत्तर भारतीयों का वोट पाने के लिए हिंदी शक्ति का निर्णय लिया गया. हम पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं."

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