बिहार में Mahatma Gandhi के परपोते का अपमान, Tushar Gandhi को मुखिया ने सभा से निकाला

चंपारण की पावन धरती, जहां महात्मा गांधी ने सत्याग्रह की नींव रखी थी, वही उनके परपोते तुषार गांधी के अपमान की गवाह बनी. रविवार को तुरकौलिया में एक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय मुखिया ने तुषार गांधी के साथ बदसलूकी की और उन्हें सभा से बाहर जाने को कह दिया.

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15 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
06:12 AM )
बिहार में Mahatma Gandhi के परपोते का अपमान, Tushar Gandhi को मुखिया ने सभा से निकाला

चंपारण की पावन धरती, जहां महात्मा गांधी ने सत्याग्रह की नींव रखी थी, वही उनके पड़पोते तुषार गांधी के अपमान की गवाह बनी. रविवार को तुरकौलिया में एक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय मुखिया ने तुषार गांधी के साथ बदसलूकी की और उन्हें सभा से बाहर जाने को कह दिया. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब तुषार के साथ आए एक वक्ता ने महागठबंधन को वोट देने की अपील की. इस घटना ने चंपारण में गांधीवादी विचारों और लोकतंत्र की चर्चा को गरमा दिया है.

ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे शुरू हुआ विवाद
तुषार गांधी 12 जुलाई से पश्चिम चंपारण के भितिहरवा आश्रम से पदयात्रा पर हैं. रविवार को वे तुरकौलिया पहुंचे, जहां उन्होंने उस ऐतिहासिक नीम के पेड़ को देखा, जिसके नीचे 1917 में महात्मा गांधी ने किसानों की पीड़ा सुनी थी. इस पेड़ की उम्र 100 साल से ज्यादा है. तुरकौलिया पूर्वी पंचायत के मुखिया विनय सिंह के निमंत्रण पर तुषार एक संगोष्ठी में शामिल हुए, लेकिन यहीं से विवाद की शुरुआत हुई

महागठबंधन की अपील पर भड़के मुखिया
कार्यक्रम के दौरान तुषार के साथ आए एक वक्ता ने महागठबंधन को वोट देने और उनके उम्मीदवारों को जिताने की अपील की. यह बात मुखिया विनय सिंह को नागवार गुजरी. उन्होंने तुषार गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, मुखिया ने सीएम नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि लोग उनकी सरकारों से खुश हैं.

तुषार गांधी ने दिया करारा जवाब
मुखिया के तीखे बयानों से तुषार गांधी भी भड़क गए. उन्होंने कहा, "आप शांति और तमीज से बात करें." इसके बाद दोनों के बीच गर्मागर्म बहस हुई. स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय लोगों और गांधीवादियों को बीच-बचाव करना पड़ा. मुखिया ने तुषार को कार्यक्रम छोड़कर जाने को कहा और उग्र हो गए. माहौल तनावपूर्ण होने पर तुषार सभा से बाहर चले गए.

तुषार बोले- 'लोकतंत्र का अपमान हुआ'
सभा से बाहर आने के बाद तुषार गांधी ने लोगों से बात की और मुखिया की हरकत की निंदा की. उन्होंने कहा, "मैं डरने वाला नहीं हूं. विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. यह सिर्फ मेरा अपमान नहीं, बल्कि गांधीवाद और लोकतंत्र का अपमान है."
तुषार ने मुखिया को 'गोडसे का वंशज' करार देते हुए कहा कि चंपारण की धरती पर ऐसा व्यवहार दुखद है.

स्थानीय लोगों ने किया मुखिया का विरोध
विवाद के बाद कई स्थानीय लोग और गांधीवादी कार्यकर्ताओं ने मुखिया विनय सिंह के रवैये का विरोध किया. लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की और माफी मांगने को कहा, लेकिन मुखिया अपनी बात पर अड़े रहे. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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क्या है तुषार गांधी की यात्रा का मकसद?
तुषार गांधी अपनी आठ दिवसीय 'परिवर्तन यात्रा' के तहत बिहार में लोगों को जागरूक कर रहे हैं. वे केंद्र और राज्य सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं. इससे पहले मुजफ्फरपुर में उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण के बहाने बीजेपी पर जना देश चोरी का आरोप लगाया था.

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