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इजरायल और अमेरिका के साथ जंग के बीच ईरान के लोगों की मदद के लिए आगे आया भारत, भेजी मेडिकल सप्लाई, VIDEO
Iran Israel War: भारत ने इजरायल और अमेरिका के साथ जंग के बीच ईरान के लिए भारी मात्रा में मेडिकल सप्लाई भेजी है. युद्ध में जख्मी और जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे लोगों के लिए ये संजीवनी का काम करेगा.
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ईरान और इजरायल के बीच जंग का आज 19वां दिन है. फरवरी के अंत में शुरू हुई लड़ाई अब पूरे खाड़ी में फैल चुकी है. इस दौरान अमेरिका-इजरायल के साझे हमले में ईरान में के हजारों लोग और सैकड़ों टॉप आफिशियल्स मारे गए हैं. देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं और दवाईयों-जरूरी सामानों की किल्लत हो गई है. इसी को देखते हुए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है.
भारत ने ईरान को भेजी मेडिकल सप्लाई
इजरायली हमले में ईरान के सबसे ताकतवर श्ख्स अली लारीजानी के मारे जाने के बाद भारत ने ईरान के लिए मेडिकल सप्लाई की पहली खेप भेजी है. ईरानी दूतावास ने इसको लेकर भारत की तारीफ की है और इस मुश्किल हालात में उसका साथ और मानवीय कदम उठाने की सराहना करते हुए दिल से आभार जताया है.
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मुश्किल के वक्त ईरना की मदद के लिए आगे आया भारत
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आपको बता दें कि भारत ने ईरान के लिए यह सहायता ऐसे समय में भेजी है जब ईरानी एयरस्पेस करीब-करीब बंद है, प्रतिबंध और सेंशन के कारण जरूरी सामानों की भी पूर्ति नहीं हो पा रही है. भारत द्वारा भेजी गई दवाईयों और मेडिकल एड की आपूर्ति बुधवार को राजधानी तेहरान में ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने ली. बॉक्स पर लिखा गया है कि भारत की जनता द्वारा ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी को दान की गई चिकित्सा सहायता.
ईरान ने जताया भारत का आभार
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भारत में ईरानी दूतावास ने कहा कि यह सामग्री ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को प्राप्त हो गई है और उसने भारत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है. भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “भारत के सम्मानित लोगों की ओर से चिकित्सा सहायता की पहली खेप पहुंचा दी गई है. हम भारत के दयालु लोगों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं.”
हाल के वर्षों में, भारत अन्य देशों को सहायता प्रदान करने वाले एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है. यह सहायता ऐसे समय में आ रही है जब ईरान 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान के प्रभावों से जूझ रहा है. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं और 7,000 से अधिक घायल हुए हैं.
कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचा एक और जहाज
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आपको बताएं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉकेज के कारण खतरों के बीच यूएई से चला भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर 'जग लाडकी' बुधवार को भारत पहुंच गया है. इसने गुजरात में अदाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया है.
इस टैंकर में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्राप्त लगभग 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल है, जिसे फुजैराह बंदरगाह पर लोड किया गया था. इस 274.19 मीटर की लंबाई और 50.04 मीटर की चौड़ाई वाले टैंकर का डेडवेट टन भार लगभग 164,716 टन और ग्रॉस टन भार लगभग 84,735 टन है.
फुजैराह बंदरगाह, मध्य पूर्व में मौजूद उन गिने चुने बंदरगाहों में से एक है, जो कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है. ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के कारण फारस की खाड़ी में मौजूद यह संकरा रास्ता प्रभावित है और इससे विश्व के कुल कच्चे तेल का 20 प्रतिशत का आवागमन होता है.
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LPG लेकर भारत पहुंचे शिवालिक और नंदा देवी
ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के बीच केंद्र सरकार लगातार देश की निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है. इससे पहले शिवालिक और नंदा देवी दो एलपीजी लदे जहाज भारत पहुंच चुके हैं. इसमें शिवालिक ने भी मुद्रा पोर्ट पर सोमवार को डॉक किया था.
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वहीं, नंदा देवी ने कंडला पोर्ट के पास स्थित वडीनार पोर्ट पर डॉक किया था. वडीनार पोर्ट, गुजरात में कच्छ की खाड़ी के पास स्थित एक प्रमुख ऑफ-शोर ऑयल टर्मिनल है, जो दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (पूर्व में कांडला पोर्ट) का हिस्सा है. शिवालिक और नंदा देवी दोनों में 92,700 टन के करीब एलपीजी थी, जिसमें शिवालिक में 46,000 टन से ज्यादा और नंदा देवी में 47,000 टन से ज्यादा एलपीजी थी.