‘यातना या मौत का डर नहीं, मैं लौटूंगी’, शेख हसीना ने फिर किया बांग्लादेश वापसी का ऐलान, भारत को कहा- शुक्रिया
अगस्त 2024 में सरकार गिरने के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. उन्होंने फिर एक दोहराया कि वे हर खतरे के बीच अपने देश लौटेंगी.
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खतरों की परवाह किए बगैर वापस अपने देश लौटने की इच्छा जताई. उन्होंने कहा कि जब उनके समर्थक और आम बांग्लादेशी लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, तब वह देश से दूर नहीं रह सकतीं. वॉशिंगटन स्थित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए हसीना ने कहा कि वापसी से जुड़े खतरे उन्हें रोक नहीं सकते.
शेख हसीना ने कहा कि वह हर हाल में अपने देश वापस लौटना चाहती हैं, भले ही वहां पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार किया जाए, यातना दी जाए या उनकी जान को खतरा हो. उन्होंने कहा,
‘वापसी कितनी भी जोखिम भरी क्यों न हो, मुझे इसकी परवाह नहीं है. मुझे वापस जाना ही होगा.’
भारत का जताया आभार
अगस्त 2024 में उनकी सरकार गिरने के बाद उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत में रह रहीं हसीना ने भारत सरकार और भारतीय जनता का धन्यवाद भी किया. उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में भारत ने उन्हें शरण और सहयोग दिया. हसीना ने कहा,
‘मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी दलों की आभारी हूं. उन्होंने मुझे उसी तरह अपनाया जैसे 1975 में किया था.’
उन्होंने 1975 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और वह और उनकी बहन बच गई थीं.
1981 के बाद वापसी को किया याद
हसीना ने कहा कि उन्हें पता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें जेल जाना पड़ सकता है या हिंसा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उनका मानना है कि एक राजनीतिक नेता होने के नाते उनके समर्थकों के साथ खड़ा होना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के कई पुराने अनुभव याद किए, जब जान का खतरा होने के बावजूद वह बांग्लादेश लौटी थीं.
इनमें 1981 में विदेश में कई साल बिताने के बाद उनकी वापसी भी शामिल है. उस समय उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान और परिवार के अन्य सदस्यों की 1975 में हत्या हो चुकी थी.
उन्होंने 2007 के राजनीतिक आपातकाल का भी जिक्र किया, जब उनके खिलाफ आपराधिक आरोप लगे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वापस लौटने का फैसला किया था. हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व उनके और आवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कानूनी मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कर रही है.
उन्होंने इन मामलों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि राजनीतिक नेताओं के खिलाफ आरोपों का फैसला निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए. हालांकि, उन्होंने अपनी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई, बाद में उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने पत्रकारों से कहा कि अभी तारीख तय नहीं हुई है और सही समय आने पर इसकी घोषणा की जाएगी.
अमेरिका से अपील करते हुए हसीना ने कहा कि वॉशिंगटन को बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, बहुदलीय राजनीति और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करना चाहिए, न कि किसी एक नेता या राजनीतिक दल का.
उन्होंने कहा, ‘मेरा संदेश अमेरिका के लिए यह है कि वह शेख हसीना या किसी दूसरे नेता को न चुने, बल्कि लोकतंत्र को चुने.’
हसीना ने कहा कि बांग्लादेश का भविष्य वहां के लोगों को स्वतंत्र और सभी को साथ लेकर चलने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से तय करना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि बांग्लादेशी लोग एक स्वतंत्र और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए अपनी सरकार चुनें.’
पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक संगठन बनाने की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून के उचित पालन की भी मांग की. उन्होंने कहा कि अगर किसी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है, तो इससे देश में विभाजन और बढ़ेगा और राष्ट्रीय मेल-मिलाप की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा. हसीना ने कहा,
‘जो लोग मेरी सरकार का विरोध करते हैं, वे भी इस देश के नागरिक हैं और उनके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए. बांग्लादेश का भविष्य बदले की भावना नहीं, बल्कि मेल-मिलाप के आधार पर बनना चाहिए.’
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनकी सरकार के कामकाज और 2024 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रमों पर कई कठिन सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा, ‘मैं मानती हूं कि मेरी सरकार, 2024 की घटनाओं और उसके बाद की परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर सवाल हैं.’
हसीना का कहना था कि उनके खिलाफ हो या किसी और के खिलाफ, सभी आरोपों की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए.
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With IANS Input