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हनीट्रैप, पैसे और ब्लैकमेल...'हिंदू युवाओं' को ढाल बनाकर गजवा-ए-हिंद की साजिश, पाकिस्तान से जुड़े तार, एजेंसियों की जांच में कई बड़े खुलासे

Terrorist Networks: सबसे ज्यादा चिंता की बात यह हैं कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली, यूपी और आसपास के राज्यों से कई हिंदू युवकों की गिरफ्तारी हुई हैं, जिन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क के लिए काम करने का आरोप हैं.

Image Source: Canva
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Terrorist Networks: देश में आंतकी नेटवर्क को लेकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है. जांच एजेंसियो के मुताबिक अब आंतक फैलाने वाले नेटवर्क सिर्फ सीमावर्ती इलाक़ो या कट्टरपंथी संगठनों तक सिमित नहीं रह गए है, बल्कि आम युवाओं को भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह हैं कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली, यूपी और आसपास के राज्यों से कई हिंदू युवकों की गिरफ्तारी हुई हैं, जिन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क के लिए काम करने का आरोप हैं. इस पुरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियो की चिंता बढ़ा दी हैं. जांच में सामने आया हैं कि युवाओं को सीधे हथियार नहीं थमाए जाते, बल्कि पहले उनका भरोसा जीता जाता हैं. किसी को पैसों का लालच दिया जाता हैं , किसी को विदेश में बसाने का सपना दिखाया जाता हैं , तो किसी को प्रेमजाल और ब्लैकमेलिंग के जरिए धीरे -धीरे नेटवर्क में धकेल दिया जाता हैं. एजेंसियो का कहना हैं कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस काम का सबसे बड़ा जरिया बन चुके हैं.

कैसे फैलाया जा रहा था जाल

यूपी ATS और IB ने 14 मार्च को गाजियाबाद में एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया था. जांच में पता चला कि पाकिस्तान से जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट के इशारे पर कई संवेदनशील जगहों पर सोलर कैमरे लगाए गए थे. इनमें सैन्य क्षेत्र, रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल थे. इस मामले में मेरठ के सुहेल और संभल की साने इरम उर्फ महक समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो 20 मार्च को ATS ने इसी नेटवर्क से जुड़े 11 और लोगों को पकड़ा. इनमें कई हिंदू युवक भी शामिल थे. अब तक कुल 21 हिंदू युवकों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एजेंसियों का कहना है कि यह सिर्फ एक छोटा हिस्सा हो सकता है और नेटवर्क कहीं ज्यादा बड़ा है.

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तुषार से ‘हिजबुल्लाह’ तक का सफर

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मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी तुषार का मामला जांच एजेंसियों के लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाला माना जा रहा है. ATS के अनुसार तुषार का माइंडवॉश किया गया, उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और उसका नाम ‘हिजबुल्लाह’ रखा गया. बताया गया कि ISI के अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए उससे संपर्क में रहते थे.
जांच में सामने आया कि तुषार को धीरे-धीरे कट्टर सोच की तरफ धकेला गया. उसे यह भरोसा दिलाया गया कि वह किसी बड़े मिशन का हिस्सा है. इसी तरह कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा और बाराबंकी के दानियाल अशरफ को भी इसी नेटवर्क से जोड़ा गया. एजेंसियों का कहना है कि इन युवाओं को पहले मानसिक रूप से तैयार किया जाता है, ताकि वे धीरे-धीरे नेटवर्क के लिए काम करने लगें.

ब्लैकमेल और हनीट्रैप का भी इस्तेमाल

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महाराष्ट्र के दुर्गेश का मामला दिखाता है कि अब आतंकी नेटवर्क साइबर अपराध और ब्लैकमेलिंग का भी सहारा ले रहे हैं. जांच में सामने आया कि दुर्गेश का फोन हैक कर लिया गया था. फोन में मौजूद निजी तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर उसे मजबूर किया गया. इसके बाद उससे नेटवर्क के लोगों तक पैसे पहुंचवाए गए.
इसी तरह संभल की महक को प्रेमजाल में फंसाकर रेकी कराई गई. जांच एजेंसियों का मानना है कि अब आतंक फैलाने वाले नेटवर्क सिर्फ बंदूक या बम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानसिक दबाव, ऑनलाइन फ्रॉड और भावनात्मक शोषण को भी हथियार बना रहे हैं.

सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस पूरे नेटवर्क का सबसे मजबूत जरिया बन चुके हैं. युवाओं को पहले दोस्ती, नौकरी, विदेश भेजने या आसान कमाई के नाम पर संपर्क किया जाता है. फिर धीरे-धीरे उन्हें ऐसे लोगों और विचारों से जोड़ा जाता है, जो देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होते हैं.
यूपी पुलिस मुख्यालय ने भी इसको लेकर अलर्ट जारी किया है. कई संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कितने लोग इस नेटवर्क के संपर्क में हैं और किन-किन राज्यों तक इसका फैलाव हो चुका है.

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दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई राज्यों से लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें यूपी, पंजाब, मध्यप्रदेश और गुजरात के आरोपी शामिल हैं. जांच में इनका संबंध भी शहजाद भट्टी से जुड़ा बताया गया.

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब चुनौती सिर्फ सीमा पार से आने वाले आतंकियों की नहीं है, बल्कि उन नेटवर्क की भी है जो देश के अंदर बैठकर युवाओं को बरगलाने का काम कर रहे हैं. यही वजह है कि ATS, IB और पुलिस लगातार सतर्क हैं और सोशल मीडिया से लेकर संदिग्ध गतिविधियों तक हर चीज पर नजर रखी जा रही है.

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युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत

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पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को कितना सतर्क रहने की जरूरत है. छोटी-सी दोस्ती, आसान पैसे का लालच या विदेश में नौकरी का सपना कई बार उन्हें ऐसे जाल में फंसा सकता है, जहां से निकलना मुश्किल हो जाता है.
जांच एजेंसियां लगातार लोगों से अपील कर रही हैं कि किसी अनजान व्यक्ति के संपर्क में आने, संदिग्ध ऑफर मिलने या सोशल मीडिया पर भड़काऊ बातचीत होने पर तुरंत पुलिस को जानकारी दें. क्योंकि आज का आतंकी नेटवर्क पहले जैसा नहीं रहा, वह अब लोगों के दिमाग और भावनाओं को निशाना बना रहा है.

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