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बंगाल के रण में यूपी के ‘सिंघम’ की एंट्री- जानिए कौन हैं एनकाउंडर स्पेशलिस्ट IPS अजय पाल शार्मा, जिनसे थर-थर कांपते हैं अपराधी
उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस (IPS) अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. ऐसे में हर कोई इनके बारे में जानना चाहते हैं. चलिए, विस्तार से उनके बारे में आपको बताते हैं.
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उत्तर प्रदेश पुलिस के 'सिंघम' और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से मशहूर अजय पाल शर्मा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं, हालांकि, इस बार उनकी चर्चा किसी एनकाउंडर को लेकर नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उनकी भूमिका को लेकर है.
IPS अजय पाल शर्मा की दक्षिण 24 परगना में नियुक्ति
दरअसल, चुनाव आयोग ने IPS अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया है. यह क्षेत्र TMC के दिग्गज नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है. वहीं, तैनाती के दौरान अजय पाल शर्मा ने TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. IPS अजय पाल शर्मा का यह कड़क तेवर देख अब हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है.
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डॉक्टर से IPS बने अजय पाल शर्मा
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बता दें कि अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं. यह मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने बीडीएस (BDS) यानी बैचलर ऑफ डेंटल साइंसेज की पढ़ाई की है. वर्तमान समय में वह प्रयागराज में एसीपी (ACP) के पद
पर कार्यरत हैं और पिछले साल जनवरी में उन्हें डीआईजी (DIG) रैंक पर पदोन्नत किया गया था. उन्होंने शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर जैसे जिलों में अपनी सेवा दी है, जहां उन्होंने कई साहसी ऑपरेशनों का नेतृत्व किया.
विवादों से पुराना नाता
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IPS अजय पाल शर्मा का विवादों से पुराना नाता रहा है. उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'अपराध मुक्त प्रदेश' के संकल्प को पूरा करने के लिए् कथित तौर पर कई एनकाउंटर करने के कारण चर्चा में रहे हैं और इन पर कई आरोप लगे हैं. अजय पाल शर्मा पर भ्रष्टाचार के साथ-साथ फर्जी एनकाउंटर के आरोप भी लग चुके हैं.
शामली मुठभेड़ पर सपा ने उठाए सवाल
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साल 2020 में शामली में अपराधी अकबर के साथ हुई मुठभेड़ पर समाजवादी पार्टी ने सवाल खड़े करते हुए इसे फर्जी बताया था. इससे एक साल पहले सब्बीर नामक संदिग्ध और एक कांस्टेबल की मौत के मामले में भी उनकी कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठी थीं.