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कोविड जैसी सावधानी...? PM मोदी ने फिर उठाया ऑनलाइन क्लासेज और WFH का मुद्दा, क्या देशभर में लगने वाला है लॉकडाउन! क्यों दिए ये संकेत

Oil Crisis: गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेज को प्राथमिकता देनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों से भी जहा संभव हो, वर्क फॉर्म होम यानी घर से काम करने और डिजिटल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की बात कही.

Image Source: PM Modi Tweet
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PM Modi: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके दुनिया पर पड़ रहे असर को लेकर देशवासियों से सावधानी और जिम्मेदारी दिखने की अपील की है. गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेज को प्राथमिकता देनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों से भी जहा संभव हो, वर्क फॉर्म होम यानी घर से काम करने और डिजिटल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की बात कही. PM मोदी की यह अपील ऐसे समय में आई है जब दुनिया पहले ही आर्थिक दबाव, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय संकटों से जूझ रही है, लगातार दो दिनों तक उन्होंने WFH, ऑनलाइन क्लासेज, ईंधन बचत और आयात कम करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया, जिसके बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि कहीं देश में फिर से कोविड काल जैसे कुछ नियम वापस तो नहीं आने वाले. हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक किसी तरह की पाबंदी या नए नियम लागू करने की घोषणा नहीं की गई है...

आखिर प्रधानमंत्री ने स्कूलों और दफ्तरों से क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में डिजिटल तकनीक ने कई काम आसान कर दिए है.इसलिए जहां जरूरत हो, वहां दफ्तरों में ऑनलाइन मीटिंग्स और घर से काम करने की व्यवस्था अपनाई जा सकती है. उनका मानना है कि इससे लोगों की अनावश्यक आवाजाही कम होगी, ईंधन की बचत होगी और मौजूदा संकट का असर भी थोड़ा कम किया जा सकेगा. उन्होंने स्कूलों को लेकर भी कहा कि कुछ समय के लिए ऑनलाइन पढ़ाई को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी या सिर्फ कुछ इलाकों और परिस्थितियों के हिसाब से अपनाई जाएगी. फिर भी उनके बयान के बाद लोगों को कोविड के दिनों की याद आने लगी, जब स्कूल, कॉलेज और दफ्तर लंबे समय तक ऑनलाइन मोड पर चल रहे थे.

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पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए चिंता क्यों बना?

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प्रधानमंत्री ने माना कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत पर भी दिखाई देने लगा है. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद वहां हालात और तनावपूर्ण हो गए, जिसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और तेल बाजार पर पड़ा है.

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, खासकर कच्चा तेल. ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में हालात खराब होते हैं तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट, बिजली और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देश उसी क्षेत्र से तेल लेते हैं जहां इस समय संघर्ष चल रहा है, इसलिए भारत को भी सावधानी बरतनी होगी.

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कोविड काल की याद क्यों दिला रहे हैं पीएम मोदी?

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दुनिया ने पहले कोरोना महामारी का संकट देखा, फिर आर्थिक मुश्किलें आईं और अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है. इन सभी हालात का असर हर देश पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अलग नहीं है. उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि जिस तरह देशवासियों ने कोरोना के समय एकजुट होकर मुश्किल हालात का सामना किया था, उसी तरह अब भी सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है. पीएम मोदी का कहना था कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े संकट का असर कम कर सकते हैं.

ईंधन और खाद्य तेल बचाने की अपील क्यों?

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प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन और खाद्य तेल की खपत कम करने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि भारत विदेशों से बड़ी मात्रा में खाद्य तेल और कच्चा तेल खरीदता है, जिस पर लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. इसी वजह से उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, बेवजह यात्रा से बचें और संसाधनों का समझदारी से उपयोग करें. उनका मानना है कि अगर देश के करोड़ों लोग छोटी-छोटी बचत करें तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और संकट का दबाव भी कम होगा.

क्या देश में फिर लग सकती हैं पाबंदियां?

फिलहाल सरकार ने किसी तरह के लॉकडाउन, स्कूल बंद करने या यात्रा प्रतिबंध जैसी कोई घोषणा नहीं की है. लेकिन प्रधानमंत्री की लगातार अपीलों के बाद लोगों के बीच यह चर्चा जरूर बढ़ गई है कि आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर कुछ एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं. हालांकि अभी सरकार का पूरा जोर लोगों को जागरूक करने, संसाधनों की बचत करने और डिजिटल व्यवस्था अपनाने पर दिखाई दे रहा है. सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अगर लोग समय रहते जिम्मेदारी दिखाएं, तो बड़े संकट का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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सरकार का संदेश - घबराने की नहीं, समझदारी दिखाने की जरूरत

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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में साफ कहा कि देश को घबराने की नहीं बल्कि मिलकर जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देशहित को ध्यान में रखते हुए छोटे-छोटे कदम उठाएं, क्योंकि ऐसे समय में जनता की भागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत बनती है.

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