असम आंदोलन के शहीदों पर सीएम सरमा का कांग्रेस पर हमला, कहा- 850 से ज्यादा युवाओं की मौत की जिम्मेदार तत्कालीन सरकार

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमने जो कुछ भी देखा है, युवाओं ने राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालकर असम को एक सुरक्षित जगह बनाने की मांग करते हुए अपनी जान दे दी.

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10 Dec 2025
( Updated: 11 Dec 2025
11:06 AM )
असम आंदोलन के शहीदों पर सीएम सरमा का कांग्रेस पर हमला, कहा- 850 से ज्यादा युवाओं की मौत की जिम्मेदार तत्कालीन सरकार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को असम आंदोलन के शहीदों का जिक्र करते हुए, कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कुशासन के कारण 850 से ज्यादा युवाओं की जान चली गई.

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने लगाया कांग्रेस पर आरोप

सरमा ने कहा कि जिन युवाओं ने अपनी जान दी, वे राज्य की क्रूरता के शिकार थे. उन्हें सुरक्षित असम की जायज मांग उठाने के लिए सजा दी गई.

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमने जो कुछ भी देखा है, युवाओं ने राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालकर असम को एक सुरक्षित जगह बनाने की मांग करते हुए अपनी जान दे दी.

850 से ज्यादा युवाओं की गई जान

दुर्भाग्य से, राज्य प्रशासन द्वारा की गई क्रूरता के कारण 850 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. उस समय, केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेस सत्ता में थी. असम आंदोलन के दौरान जानमाल के नुकसान के लिए कांग्रेस सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार थी."

गुवाहाटी में बने शहीद स्मारक का उद्घाटन आज

राज्य सरकार ने गुवाहाटी में शहीद स्मारक बनाया है, जिसका उद्घाटन बुधवार को होने वाला है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा राज्य सरकार ने शहर के बीचों-बीच शहीदों को एक स्थायी स्मारक देकर एक ऐतिहासिक अन्याय को ठीक किया है.

सरमा ने कहा, "उनकी एकमात्र गलती अनियंत्रित घुसपैठ को खत्म करने की मांग करना था. सालों तक असम के बहादुरों को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे."

आंदोलन के इतिहास को दर्शाएगा स्मारक

शहर के केंद्रीय इलाके में स्थित शहीद स्मारक बनाया गया है. स्मारक में आंदोलनकारियों को समर्पित शिलालेख हैं, साथ ही 1979 और 1985 के बीच असम आंदोलन के सफर को दिखाने वाली प्रदर्शनियां भी हैं.

शहीद दिवस 10 दिसंबर

अधिकारियों ने कहा कि यह स्मारक न केवल एक श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शैक्षिक स्थल भी है. 10 दिसंबर को मनाया जाने वाला शहीद दिवस 1979 में पहले शहीद खरगेश्वर तालुकदार की मौत की याद में मनाया जाता है, जिनकी हत्या ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के नेतृत्व वाले आंदोलन को और तेज कर दिया था.

दशकों से यह दिन विभिन्न पार्टियों, खासकर भाजपा के लिए एक राजनीतिक पहचान बन गया है, जिसने अपने चुनावी संदेशों में अवैध प्रवासन के मुद्दे को लगातार प्रमुखता दी है.

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मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह स्मारक राज्य की जनसांख्यिकीय पहचान की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों की याद दिलाता है. उन्होंने कहा, "शहीद स्मारक उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रमाण के रूप में खड़ा रहेगा. असम हमेशा उनका ऋणी रहेगा."

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