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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर में सरगुजा ओलंपिक 2026 का किया शुभारंभ, तीन लाख से अधिक खिलाड़ियों ने किया पंजीकरण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय सरगुजा ओलंपिक 2026 का शुभारंभ किया. कार्यक्रम में सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और एमसीबी जिलों के खिलाड़ियों ने परेड में सलामी दी.

Image Credits: IANS
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय सरगुजा ओलंपिक 2026 का शुभारंभ किया. इस दौरान सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और एमसीबी जिले के खिलाड़ियों ने परेड में सलामी दी. मुख्यमंत्री साय ने ओलंपिक मशाल जलाकर शुभारंभ किया. अंतर्राष्ट्रीय महिला रेसलर गीता फोगाट भी कार्यक्रम में शामिल हुईं.  

बस्तर के विकास में खेल का योगदान

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर का क्षेत्र अपने आप में बहुत बड़ा है लेकिन बीते 40 वर्षों से नक्सलवाद से ग्रसित रहा. इस वजह से उस क्षेत्र में विकास नहीं हो पाया. छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद मुक्त करने के लिए काम शुरू हुआ. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का नक्सवाद के खात्मे का संकल्प पूरा हो रहा है. हम लोगों ने वहां के युवाओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया था.

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उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को छोड़कर मुख्य धारा में शामिल होने वाले लोगों ने भी बस्तर ओलंपिक में भाग लिया था. आत्मसमर्पण करने वाले 700 खिलाड़ी ओलंपिक का हिस्सा थे. उन्होंने कहा कि हम लोगों का सौभाग्य है कि जब हम लोगों ने सुरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया तो गजरू को शुभंकर बनाया. इस ओलंपिक के लिए तीन लाख 49 हजार से ज्यादा पंजीकरण हुआ है.

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खेलों का भव्य आयोजन

उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में खो-खो, कबड्डी, बालीबाल, फुटबाल समेत 12 खेलों का आयोजन किया जाएगा. सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई। आने वाले वक्त में सरगुजा ओलंपिक का आयोजन करते रहेंगे.

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बड़ी भागीदारी और स्थानीय समर्थन

बता दें कि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज समेत स्थानीय मंत्री और विधायक व भारी संख्या में खिलाड़ी व आम नागरिक मौजूद रहे. सरगुजा ओलंपिक छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक बड़ा जमीनी स्तर का खेल महाकुंभ है, जो मुख्य रूप से सरगुजा संभाग (उत्तर छत्तीसगढ़) के आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं (खासकर ग्रामीण एवं आदिवासी युवाओं) को खेल का मंच देने के लिए शुरू किया गया है.

 

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