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वंदे मातरम् पर ओवैसी की टिप्पणी पर BJP का पलटवार, तरुण चुग ने साधा निशाना कहा- जो विरोध कर रहे है, वो....

Vande Mataram: भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा वंदे मातरम् पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी.. उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं, वे बौद्धिक रूप से बेईमान हैं और हास्यास्पद बयान दे रहे हैं.

Image Source: Owaisi Twitter
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Vande Mataram: 8 मई 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा वंदे मातरम् पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी.. उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं, वे बौद्धिक रूप से बेईमान हैं और हास्यास्पद बयान दे रहे हैं.
तरुण चुग ने बताया कि वंदे मातरम (Vande Mataram) पिछले 150 सालों से भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रप्रेमियों का उद्घोष रहा है. उन्होंने कहा कि आज वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ है. इसके गाए जाने पर न जाने कितने क्रांतिकारी फांसी पर चढ़ गए और शहादत दी. उन्होंने इसे अंग्रेजो के खिलाफ एक मंत्र की तरह काम करने वाला उद्घोष बताया.

वंदे मातरम् और राष्ट्रगान में अंतर

तरुण चुग ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम देवी की स्तुति है, इसलिए इसे राष्ट्रगान के समान नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि जबकि जन गण मन भारत और उसके लोगों का उत्सव मनाता है, किसी एक धर्म का उत्सव नहीं है.

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उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् के लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ब्रिटिश राज के प्रति सहानुभूति रखते थे और मुसलमानों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे. इसलिए कई स्वतंत्रता सेनानी जैसे सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया.

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ओवैसी का तर्क-  भारत देवी-देवताओं के नाम पर नहीं चलता

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा कि भारत का संविधान स्पष्ट रूप से कहता है - “हम भारत के लोग.” इसका मतलब है कि देश किसी देवी या देवता का नाम लेकर नहीं चलता. संविधान में सभी लोगों की स्वतंत्रता, विश्वास, धर्म और अभिव्यक्ति की आजादी का आश्वासन दिया गया है.

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Owaisi ने बताया कि संविधान सभा में कुछ सदस्यो ने प्रस्तावना को किसी देवी के नाम से शुरू करने का सुझाव दिया था और वंदे मातरम् का भी उल्लेख किया था. कुछ ने तो यह तक कहा कि ‘its citizens’ की जगह ‘her citizens’ लिखा जाए. लेकिन इन सभी संशोधनों को अस्वीकृत कर दिया गया.उनका कहना था कि भारत, जिसे हम इंडिया भी कहते हैं, देश के लोग हैं, देवी नहीं,..

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