Advertisement

Loading Ad...

बंगाल में TMC की विदाई से खुश है बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार, क्या है वो समझौता जिसमें ‘दीदी’ ने लगाया था अड़ंगा

BNP के अजीजुल बारी हेलाल ने उम्मीद जताई कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर दोनों देशों के आपसी संबंधों पर होगा, ये दोनों के लिए अच्छा है.

Source- IANS/PMO
Loading Ad...

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत से देश में तो समर्थक खुश हैं ही पड़ोसी मुल्क में भी खुशी का माहौल है. बंगाल से सटे बांग्लादेश में सत्ताधारी पार्टी BNP ने BJP की जीत पर खुशी जताई है. इसके पीछे की वजह है बांग्लादेश से जुड़ा एक प्रोजेक्ट जिसमें ममता बनर्जी ने अड़ंगा लगाया था. 

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए BNP ने बंगाल में BJP की जीत पर खुशी जाहिर की है. तारिक रहमान सरकार के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने PM मोदी और पार्टी को जीत की बधाई दी है. उन्होंने कहा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन भारत-बांग्लादेश के संबंधों को मजबूत कर सकते हैं. 

BNP ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?

Loading Ad...

अजीजुल बारी हेलाल ने कहा, मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने से ढाका और कोलकाता के बीच संबंध और बेहतर हो सकते हैं. विचारधारा अलग होने के बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों पक्ष साथ आ सकते हैं, जैसे तीस्ता नदी का मामला और भारत-बांग्लादेश के रिश्ते. 

Loading Ad...

उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी की गई, TMC सरकार इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी. अजीजुल बारी ने यह भी दावा किया कि बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों यह समझौता चाहते थे. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद हेलाल ने BJP के प्रमुख नेता और संभावित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से उम्मीद जताई है कि नई सरकार भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बेहतर बनाएगी और तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी. 

‘सत्ता बदलना दोनों के लिए अच्छा’

Loading Ad...

अजीजुल बारी हेलाल ने उम्मीद जताई कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर दोनों देशों के आपसी संबंधों पर होगा, ये दोनों के लिए अच्छा है. इससे दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर भी सुधार हो सकता है, क्योंकि भारत के राज्यों में बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की ही लगती है. 

क्या है तीस्ता नदी जल समझौता? 

तीस्ता नदी जल समझौता (Teesta River Water Sharing Agreement) भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चला आ रहा एक विवादित मुद्दा है. 

Loading Ad...

तीस्ता नदी सिक्किम से निकलती है, पश्चिम बंगाल से होकर बहती है और बांग्लादेश में जाकर ब्रह्मपुत्र नदी में मिलती है. दोनों देशों के लिए यह नदी कृषि, सिंचाई और लाखों लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण जरिया है. 

1983 का अस्थायी समझौता

1983 में भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त नदी आयोग (Joint Rivers Commission) के तहत अस्थायी समझौता हुआ था. इसमें भारत को 39%, बांग्लादेश को 36% पानी और 25% बिना आवंटित छोड़ दिया गया. यह स्थायी नहीं था और 1985 तक के लिए था, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुआ. 

Loading Ad...

साल 2011 में मनमोहन सिंह सरकार के समय में तैयार समझौते में सुखे मौसम में भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% पानी देने का प्रावधान था. जो कि 15 साल के लिए किया गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका पुरजोर विरोध किया. उनका तर्क था कि इससे उत्तर बंगाल में सिंचाई और पानी की कमी बढ़ जाएगी. नतीजा ये हुआ कि इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो सके. 

यह भी पढ़ें- हार के बाद तिलमिलाईं ममता बनर्जी, इस्तीफा नहीं देने पर अड़ीं, कहा- हम चुनाव नहीं हारे

यह भी पढ़ें

2011 का मसौदा मुख्य आधार है, लेकिन केंद्र-राज्य राजनीति और स्थानीय हितों के कारण यह अटका हुआ है. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, बांग्लादेश तीस्ता के 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है, जबकि भारत खुद 55 फीसदी पानी चाहता है.  

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...