Maha Kumbh: अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में आईं कौन हैं ये साध्वी ?

Maha kumbh में सबसे खूबसूरत साध्वी का टैग पाने वाली हर्षा रिछारिया क्या सच में साध्वी हैं ? लोग हर्षा के इस रूप को लेकर कई दावे कर रहे हैं लेकिन असल तस्वीर क्या है ? ये रिपोर्ट देखिए

Maha Kumbh: अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में आईं कौन हैं ये साध्वी ?
धरती के सबसे बड़े पर्व महाकुंभ में साधु-संत, अघोरियों की टोली और अजब गजब बाबा रंग जमाए हुए हैं। इन सबके बीच अब रील क्वीन की एंट्री भी हो गई है।जो सोशल मीडिया सेंसेशन के रूप में लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं लेकिन महाकुंभ में आकर वे भी सनातन के रंग में रंगी नजर आईं। कौन हैं रील की दुनिया से आईं ये नई नई साधु जिनकी महाकुंभ में हो रही चर्चा।

गले में रुद्राक्ष की माला, माथे पर तिलक, भगवा वस्त्र, ये रूप है साध्वी हर्षा रिछारिया का। जिन्होंने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज से दीक्षा लेकर सनातन और आध्यात्म की राह अपना ली। कैलाशानंद गिरि की ये शिष्या कुछ दिनों पहले तक इंस्टाग्राम सेलिब्रिटी थीं।

लेकिन महाकुंभ में इनका ऐसा रूप दिखा कि, लोग हैरान रह गए। पहचानना मुश्किल था कि ये वो ही हर्षा है जो फिल्मी गानों पर थिरकतीं थी।

महाकुंभ में हर्षा के वीडियो सामने आने के बाद लोग उनके इंस्टाग्राम के वीडियो निकालकर ला रहे हैं जिनमें वे ग्लैमरस लुक में दिख रही हैं। साथ में फिल्मी गानों पर डांस भी करती दिखीं। उनका ये लुक सामने आने के बाद लोगों ने हर्षा को ट्रोल भी करना शुरू कर दिया। किसी ने कहा, लगता है इंस्टाग्राम पर फॉलोअर कम हो गए थे।तो कुछ ने कहा, रातोंरात फॉलोअर बढ़ाने का बढ़िया तरीका। किसी ने तो हर्षा को पाखंडी तक करार दे दिया।

वायरल दावों के बीच जब हमने हर्षा रिछारिया का सोशल मीडिया हैंडल खंगाला तो पहले जहां हर्षा के सोशल मीडिया पर सात लाख फॉलोवर थे वहीं महाकुंभ में वायरल होने के बाद एक मिलियन तक पहुंच गए।महाकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई के दौरान नजर आईं साध्वी हर्षा को लोगों ने सबसे खूबसूरत साध्वी का टैग दे दिया। हालांकि एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ किया कि वे अभी साध्वी नहीं है।उन्होंने साध्वी की दीक्षा अभी तक नहीं ली है बस कैलाशानंद गिरि की शिष्या बनी हैं। हर्षा ने बताया

"दो साल पहले मेरी मुलाकात महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि से हुई थी फिर मेरा जीवन ही बदल गया। मैं आध्यात्म और सनातन धर्म की गहराइयों को समझने और सीखने में लगी हूं"

हर्षा मानती हैं कि साध्वी का टैग उनके लिए अभी सही नहीं है वह साध्वी बनने के मार्ग पर हैं पर साध्वी बनी नहीं है। सोशल मीडिया पर अपनी अदाओं से छाने वाली हर्षा अब रील के जरिए ही लोगों को आध्यात्म और सनातन के लिए जागरुक कर रही हैं एक्टिविस्ट और इंफ्लुएंसर बनकर ही वह इस मार्ग पर अपने सफर को आगे बढ़ा रही हैं। 

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