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तिलक लगाने पर उड़ा मजाक, अब छलका एकता कपूर का दर्द! ‘हिंदूफोबिया’ पर छिड़ी बहस

Ekta Kapoor: फिल्म इंडस्ट्री में हिंदू धर्म, धार्मिक प्रतीकों और भारतीय संस्कृति को लेकर अपनी राय रखी. एकता का कहना है कि इंडस्ट्री में आज भी हिंदू धर्म से जुड़ी चीजों को लेकर पूर्वाग्रह देखने को मिलता है. उनके मुताबिक, भारतीय लोककथाओं और पौराणिक कहानियों को पर्दे पर दिखाने के मामले में वैसी सहजता नजर नहीं आती, जैसी दूसरी तरह की कहानियों के लिए दिखाई जाती है.

Image Source: Ekta Kapoor/ Instagram
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Ekta Kapoor: टीवी और फिल्म जगत की जानी-मानी प्रोड्यूसर एकता कपूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट ‘द रणवीर शो’ में बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में हिंदू धर्म, धार्मिक प्रतीकों और भारतीय संस्कृति को लेकर अपनी राय रखी. एकता का कहना है कि इंडस्ट्री में आज भी हिंदू धर्म से जुड़ी चीजों को लेकर पूर्वाग्रह देखने को मिलता है. उनके मुताबिक, भारतीय लोककथाओं और पौराणिक कहानियों को पर्दे पर दिखाने के मामले में वैसी सहजता नजर नहीं आती, जैसी दूसरी तरह की कहानियों के लिए दिखाई जाती है. उन्होंने साफ कहा कि वह कैमरे के सामने इस मुद्दे पर अपनी बात रखने से नहीं हिचकिचातीं.

माथे पर तिलक लगाने पर सुननी पड़ीं बातें

बातचीत के दौरान एकता कपूर ने अपने बचपन से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वह छोटी थीं और माथे पर तिलक लगाती थीं, तब कुछ लोगों ने उनके धार्मिक प्रतीकों को देखकर अजीब टिप्पणियां की थीं. एक व्यक्ति ने तो उन्हें ‘फ्रीक’ तक कह दिया था. एकता ने सवाल उठाया कि माथे पर तिलक लगाना या हाथ में धार्मिक धागा पहनना आखिर किसी को असामान्य क्यों लगना चाहिए. इसी बातचीत में रणवीर इलाहाबादिया ने भी जिक्र किया कि लोगों ने एकता को ‘तांत्रिक’ तक कहा था. इन अनुभवों के जरिए एकता ने धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों को लेकर लोगों की सोच पर सवाल खड़े किए.

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मंदिर जाने के बाद क्लब पहुंचने पर भी हुआ सवाल

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एकता ने एक और किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार वह मंदिर जाने के बाद क्लब पहुंची थीं. वहां किसी ने उनसे पूछा कि क्या वह मंदिर होकर आई हैं. इस सवाल पर उन्हें हैरानी हुई, क्योंकि उनके लिए धार्मिक आस्था और आधुनिक जीवनशैली एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं. उनका मानना है कि मंदिर जाना और उसके बाद दोस्तों के साथ बाहर जाना बिल्कुल सामान्य बात है. किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर उसके रहन-सहन या पसंद को लेकर सवाल उठाना उनकी नजर में सोचने वाली बात है.

‘द ववान’ के जरिए भारतीय लोककथाओं को दिखाने की कोशिश

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एकता कपूर भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने की दिशा में भी काम कर रही हैं. उनकी फिल्म ‘द ववान’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे. एकता का उद्देश्य भारतीय लोककथाओं और पारंपरिक कहानियों को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना है. उनका मानना है कि इन कहानियों को भी खुले मन से स्वीकार किया जाना चाहिए. उनके बयान ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भारतीय संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है.

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