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कौन है ये एक्टर, जिसे अपने ही गांव में नहीं है मंदिर में घुसने की इजाजत, वजह आपको चौंका देगी

पंचायत सीरीज़ के एक एक्टर ने जातिवाद का अपना एक चौंकाने वाला अनुभव शेयर किया है, जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगा की फिल्मी हस्तियों को भी इन सब से गुजरना पड़ता है.

Image Credits:Instagram/neena_gupta
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आम लोगों के साथ तो जातिवाद तो होता हुआ आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं, एक्टर के साथ भी जातिवाद होता है, ये जानकर आपको हैरानी तो ज़रूर हुई होगी. लेकिन हैरान मत होएं, ये सच है. 

जातिवाद का शिकार हुआ पंचायत का ये एक्टर

पंचायत सीरीज़ तो आपने देखी होगी, अगर देखी भी नहीं है, तो उसके बारे में आपको पता तो होगा की ये कितनी फेमस सीरीज़ है. अब पंचायत सीरीज़ के एक एक्टर ने जातिवाद का अपना एक चौंकाने वाला अनुभव शेयर किया है, जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगा की फिल्मी हस्तियों को भी इन सब से गुजरना पड़ता है. 

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‘हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं है’

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पंचायत एक्टर विनोद सूर्यवंशी, जिन्होंने एक छोटे से रोल में भी अपनी दमदार अदाकारी से हर किसी के दिल पर छाप छोड़ी है, उन्होंने हाल ही में एक अपने होमटाउन कर्नाटक में जातिवाद को झेला है, एक पॉडकास्ट में बात करते हुए विनोद सूर्यवंशी ने कहा, "कर्नाटक में मेरे गांव में, आज भी जातिवाद फैला हुआ है. उस गांव में दो इलाके हैं – एक ऊंची जातियों के लिए और दूसरा नीची जातियों के लिए. जिस इलाके में दलित रहते हैं, वह गांव से अलग है. एक बार, जब मैं अपने पिता के साथ गांव गया था तब मैं 12 साल का था. हमने एक होटल में खाना खाया, तो हमें अपनी प्लेटें खुद धोनी पड़ीं और खाने के पैसे भी देने पड़े. मेरे गांव में आज भी एक ऐसा मंदिर है, जहां हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं है."

‘इसका रंग सांवला है, इसे वापस भेज दो’

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विनोद सूर्यवंशी का फिल्मी सफ़र भी आसान नहीं आ रहा है, सिक्योरिटी गार्ड से जूनियर ऑर्टिस्ट बनने तक और बड़ी फिल्मों में मौका हासिल करने तक पंचायत एक्टर के लिए ये सब बिल्कुल भी आम नहीं रहा है. एक्टर ने ये भी खुलासा किया है की लुक्स की वजह से कई बार उन्हें रिजेक्ट तक किया गया. 

एक्टर ने खुलासा करते हुए बताया, "मुझे अपने लुक्स की वजह से कई बार रिजेक्ट किया गया. जब मैंने टीवी के लिए ऑडिशन दिए तो वे अक्सर 'अमीर दिखने वाला' चेहरा चाहते थे. यहां तक कि एक भिखारी के रोल के लिए भी वे किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते थे जो अमीर दिखे. मुझसे कहा गया कि मैं उनकी जरूरत के हिसाब से फिट नहीं बैठता. मुझे एक नौकर के रोल के लिए चुना गया था. कास्टिंग टीम ने मुझे फाइनल कर लिया था और मैं शूट के लिए समय पर पहुंच गया. लेकिन जब क्रिएटिव डायरेक्टर आईं, तो उन्होंने पूछा कि मैं कौन हूं. जब उन्हें बताया गया, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, यह नहीं चलेगा.  हमें गोरे रंग वाला कोई चाहिए. इसका रंग सांवला है, इसे वापस भेज दो’”

‘मेरे बचपन का माहौल अच्छा नहीं था’

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एक्टर यहीं नहीं रुके उन्होंने अपने बचपन के ट्रॉमा का जिक्र करते हुए बताया, "मेरी मां घरों में काम करती थीं और मेरे पिता राजमिस्त्री थे. उन्हें हर दिन काम नहीं मिलता था और जब काम नहीं मिलता था, तो वे शराब पीकर घर आते थे. मेरे बचपन का माहौल अच्छा नहीं था. वे मेरी मां को गालियां देते थे और उन्हें मारते भी थे. मैं यह सब देखते हुए बड़ा हुआ और मुझे यह बहुत बुरा लगता था. मुझे उनसे नफरत नहीं थी, लेकिन उनका यह बर्ताव मुझे पसंद नहीं था." 

इन फिल्मों में काम कर चुके हैं विनोद सूर्यवंशी

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बता दें कि पंचायत जैसी सीरीज़ में छोटा सा किरदार निभाने के अलावा भी विनोद सूर्यवंशी ने कई बडे-बड़े प्रोजेक्ट्स में काम किया है. पंचायत के अलावा विनोद ने 'थम्मा', 'सत्यमेव जयते', 'जॉली LLB 3' और दूसरी फिल्मों में भी छोटी-छोटी भूमिकाएं निभाई हैं.

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