जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

नवरात्र का सातवां दिन आज, मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना से दूर होते हैं भय और बाधाएं

मां कालरात्रि का स्वरूप इसी शक्ति का प्रतीक है, जो अधर्म और नकारात्मक शक्तियों का अंत कर धर्म की रक्षा करती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने देवी को काली कह दिया था. इसके बाद देवी का नाम काली पड़ गया. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में भले ही उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के प्रति उनका स्वरूप कल्याणकारी है.

नवरात्र का सातवां दिन आज, मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना से दूर होते हैं भय और बाधाएं
Image Credits: X/@ombirlakota
Advertisement

शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को मां भगवती के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व है. इनमें मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली, व्यापक और अनंत माना गया है.  

मां कालरात्रि की आराधना करने से साधक के भय दूर होते हैं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना करने से साधक के भय दूर होते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यताओं में मां कालरात्रि को काल पर विजय प्राप्त करने वाली देवी बताया गया है. कालरात्रि का अर्थ है काल को जीतने वाली शक्ति. देवी के इस स्वरूप को बुराई, नकारात्मकता और भय का नाश करने वाला माना जाता है.

मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है

Advertisement

मान्यता है कि सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्म, पालन और काल देवी शक्ति के तीन प्रमुख स्वरूपों से जुड़े हैं. सृष्टि का सृजन, संयोजन और संचालन देवी की कृपा का फल माना जाता है. मां भगवती को संपूर्ण जगत की आधार शक्ति के रूप में पूजा जाता है.

मां कालरात्रि की पूजा में विशेष नियमों का पालन किया जाता है

मां कालरात्रि का स्वरूप इसी शक्ति का प्रतीक है, जो अधर्म और नकारात्मक शक्तियों का अंत कर धर्म की रक्षा करती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने देवी को काली कह दिया था. इसके बाद देवी का नाम काली पड़ गया. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में भले ही उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के प्रति उनका स्वरूप कल्याणकारी है. इसी वजह से उन्हें संकटों से रक्षा करने वाली और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा में विशेष नियमों का पालन किया जाता है.

अखंड ज्योति जलाकर मां की आराधना करना शुभ माना जाता है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात अखंड ज्योति जलाकर मां की आराधना करना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही काले तिल से पूजन, मंत्र जाप और तप करने का विशेष महत्व बताया गया है. श्रद्धालु माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करते हैं. मान्यता है कि रात्रि के समय श्रद्धापूर्वक यज्ञ और पूजा-अर्चना करने से साधक के मनोरथ पूर्ण होते हैं.

Advertisement

श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर मां भगवती की आराधना करते हैं

मां कालरात्रि की उपासना के दौरान मन को शांत रखकर ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए. भक्त माता से जीवन के संकटों को दूर करने, नकारात्मकता से मुक्ति और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं. नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के दौरान देवी के मंत्र का जाप किया जाता है. जो है - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे. श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर मां भगवती की आराधना करते हैं.

यह भी पढ़ें

मान्यता है कि मां कालरात्रि की भक्ति, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से मन में साहस का संचार होता है. नवरात्र का यह दिन शक्ति की उपासना, आत्मविश्वास और बुराइयों पर विजय के संकल्प का प्रतीक माना जाता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें