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15 अक्टूबर का पंचांग: ललिता पंचमी पर कब है पूजा का शुभ समय, जानें राहु काल और दिनभर के मुहूर्त
पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी दी जाती है.
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हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है. कोई शुभ काम शुरू करना हो, पूजा-पाठ करना हो, यात्रा पर जाना हो या फिर कोई नया निवेश करना हो, कई लोग सबसे पहले पंचांग देखते हैं. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी दी जाती है.
इस पंचमी तिथि का अपना अलग धार्मिक महत्व है
पंचांग के अनुसार, 15 अक्टूबर को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है. इस दिन ललिता पंचमी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा-अर्चना के लिए खास माना जाता है. भक्त इस दिन देवी की आराधना करके सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली इस पंचमी तिथि का अपना अलग धार्मिक महत्व है.
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योग
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इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. अमृत काल रात 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेगा. सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा.वहीं, ज्येष्ठा नक्षत्र का समय 15 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 16 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं, सौभाग्य योग रात 8 बजकर 38 मिनट तक बताया गया है, जिसके बाद शोभन योग शुरू होगा.
करण
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करण की बात करें तो बव करण रात 1 बजकर 13 मिनट से दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. इसके बाद बालव करण शुरू होगा, जो 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. फिर कौलव करण का समय शुरू होगा.
ब्रह्म मुहूर्त
15 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 57 मिनट पर बताया गया है. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. चंद्रोदय सुबह 10 बजकर 31 मिनट और चंद्रास्त रात 9 बजकर 10 मिनट पर होगा.
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राहुकाल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ काम शुरू करने से पहले राहुकाल और अन्य अशुभ समय का ध्यान रखा जाता है. इस दिन राहुकाल दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक और कुलिक काल सुबह 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा.
दिशाशूल
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पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है. इसलिए मान्यता के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए. अगर यात्रा करना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है.