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PM मोदी के लिए बलूचिस्तान के इस भारी भरकम ऑफ़र से सिर पीटने लगा पाकिस्तान

भारत के लिए 6 करोड़ बलूचों की ताक़त एकजुट क्या हुई, दुश्मनों के पसीने छूट गए. माँ हिंगलाज शक्तिपीठ के नाम पर बलूचों ने मोदी सरकार को बड़ा ऑफ़र दिया. नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तानी आर्मी और हुकूमत दोनों अपना सिर पीटने लगे. आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी ABC.

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बलूचिस्तान ने भारत को डिजिटल पत्र क्या भेजा, पाकिस्तान समेत चीन की रातों-रात नींद उड़ गई. भारत के लिए 6 करोड़ बलूचों की ताक़त एकजुट क्या हुई, दुश्मनों के पसीने छूटने लगे. माँ हिंगलाज शक्तिपीठ के नाम पर बलूचों ने मोदी सरकार को तोहफ़ा ऑफ़र क्या दिया, पाकिस्तानी आर्मी और हुकूमत दोनों अपना सिर पीटने लगे. आइए जानते हैं ये पूरा मामला.

आज भले ही पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर बलूचिस्तान को पाकिस्तान के माथे का झूमर बताते हैं. लेकिन इस झूमर की रोशनी को कभी जगमगाने नहीं दिया गया. पाकिस्तानी हुकूमत ना तो बलूच लोगों को मूलभूत सुविधाएँ दे पाई और ना ही उन्हें उज्जवल भविष्य. इसके उलट बलूच लोग अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग तक नहीं कर सकते. ना ही वे सरकारी उच्च पदों पर आसीन हो सकते हैं. उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है और न ही अपने साथ होने वाले अत्याचार के ख़िलाफ आवाज उठाने की आज़ादी.

इन्हीं कारणों से 6 करोड़ बलूचों को अपनी एकजुटता दिखानी पड़ी. इसी एकजुटता का नतीजा है कि आज का बलूचिस्तान माँ हिंगलाज शक्तिपीठ के नाम पर मोदी सरकार को बड़ा ऑफ़र दे रहा है. भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर, 51 शक्तिपीठों में से एक यह धाम बलूचिस्तान की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित है. माँ हिंगलाज को समर्पित यह दिव्य धाम हिंदुओं के लिए कितने मायने रखता है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि यहाँ स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम पधारे थे. यही नहीं, भगवान परशुराम के पिता, गुरु गोरखनाथ, दादा मखान और गुरु नानक ने भी यहाँ तप साधना की. यही कारण है कि यहाँ शक्ति अपने जागृत रूप में विराजमान है. कट्टरपंथी हमलों के बावजूद नाथ संप्रदाय की कुलदेवी का यह धाम आज भी सुरक्षित है. नापाक इरादों से जो भी माँ हिंगलाज की चौखट पर आया, वह उसी समय भस्म हो गया. इसी शक्तिपीठ के नाम पर बलूचिस्तान के 6 करोड़ लोगों ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने पीएम मोदी से मदद माँगते हुए एक डिजिटल पत्र लिखा है. इस खत में पाकिस्तान के विनाश की पूरी स्क्रिप्ट दर्ज है.

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वैश्विक मंच पर बलूचिस्तान के लिए आवाज़ उठाने वाले मीर यार बलोच ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक डिजिटल पत्र भेजा है. यह पत्र उन्होंने 6 करोड़ बलूचों की ओर से लिखा और सोशल मीडिया के ज़रिए भारत तक पहुँचाया. इस खत में मीर यार बलोच ने न सिर्फ़ भारत सरकार से अपील की है, बल्कि यह भी बताया है कि बलूचों का साथ देने से भारत को क्या-क्या फ़ायदे होंगे. दरअसल, यह पत्र उसी समय का है जब संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा हुई थी. पत्र में लिखा गया कि पूरी दुनिया में बसे 6 करोड़ बलूच भारत के भाइयों और बहनों को संदेश देना चाहते हैं. मीर यार बलोच ने संसद में हुई चर्चा और पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत की कड़ी कार्रवाई की सराहना की. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान भारत की एकता और साहस को सलाम करता है. इसी पत्र में मीर यार बलोच ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक बड़ा प्रस्ताव भी रखा. पहले उन्होंने भारतीय सेना के असाधारण साहस को सैल्यूट किया. फिर यह स्पष्ट किया कि अगर मोदी सरकार बलूचिस्तान को पाकिस्तान के चंगुल से आज़ाद कराने में सफल हो पाती है, तो इससे भारत को बहुत बड़े फ़ायदे होंगे.

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आज़ाद बलूचिस्तान भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत साबित हो सकता है. ग्वादर पोर्ट के ज़रिए पाकिस्तान की अरब सागर तक की पहुँच को काटा जा सकता है. चीन-पाकिस्तान का आर्थिक कॉरिडोर, जो भारत की संप्रभुता के लिए बड़ा ख़तरा बन चुका है, पूरी तरह बर्बाद किया जा सकता है.

बलूचिस्तान भारत की कनेक्टिविटी और ऊर्जा की ज़रूरतों को भी पूरा कर सकता है. यहाँ खनिजों की भरमार है. आज़ाद बलूचिस्तान के बाद भारत को मध्य एशिया, मिडल ईस्ट और यूरोप से सीधा व्यापार करने का रास्ता मिल जाएगा. इसके साथ ही दोनों मुल्कों के बीच सांस्कृतिक संबंध भी स्थापित होंगे. इसकी नींव हिंगलाज शक्तिपीठ से रखी जाएगी. यानी भारतीयों को माँ हिंगलाज के दरबार तक डायरेक्ट पहुँच हासिल होगी. सौ बात की एक बात ये है कि अगर मोदी सरकार 6 करोड़ बलूचों के इस प्रपोज़ल को स्वीकार करती है, तो बिना युद्ध किए पाकिस्तान और चीन दोनों की चालें मिट्टी में मिल सकती हैं. साथ ही सदियों बाद भारत के 100 करोड़ हिंदू माँ हिंगलाज के दर्शन कर पाएंगे. लेकिन बड़ा सवाल यही है. क्या सच में बलूचिस्तान के इस प्रस्ताव पर गौर किया जा सकता है? 

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