बसंत पंचमी पर एक दिन के लिए इस मंदिर में खुलता है रहस्यमयी कमरा, विदेशों से दर्शन करने के लिए आते हैं भक्त
ब्रज में बसंत पंचमी के साथ ही मंदिर में गुलाल उड़ने लगते हैं और मंदिर को पीले फूलों और रंगों से सजा दिया जाता है, लेकिन बसंत पंचमी के दिन वृंदावन के एक मंदिर में अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जहां एक कमरे को देखने के लिए भक्त विदेशों से आते हैं. हम बात कर रहे हैं शाहजी मंदिर की, जिसे टेढ़े खंभे के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.
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देशभर में 23 जनवरी को बसंत पंचमी का त्योहार पूरे धूमधाम से मनाया जाने वाला है, खास तौर पर ब्रज मंडल के क्षेत्रों में.
किस मंदिर में बसंत पंचमी पर दिखता है अद्भुत नजारा
ब्रज में बसंत पंचमी के साथ ही मंदिर में गुलाल उड़ने लगते हैं और मंदिर को पीले फूलों और रंगों से सजा दिया जाता है, लेकिन बसंत पंचमी के दिन वृंदावन के एक मंदिर में अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जहां एक कमरे को देखने के लिए भक्त विदेशों से आते हैं. हम बात कर रहे हैं शाहजी मंदिर की, जिसे टेढ़े खंभे के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.
मंदिर में खुलता है रहस्यमयी कमरा
शाहजी मंदिर, या टेढ़े खंभे का मंदिर, प्रभु राधारमण जी को समर्पित है. मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ विशेष आयोजन और बनावट के लिए भी जाना जाता है. बसंत पंचमी के दिन मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं, जो देश के किसी और मंदिर में देखने को नहीं मिलते. इस मंदिर में रहस्यमी कमरे के दरवाजे खोले जाते हैं, जिसे 'बसंती कमरा' कहा जाता है. यह कमरा साल में 1 दिन बसंत पंचमी के दिन ही खुलता है.
मंदिर में पीले वस्त्र पहले राधा रमणजी लाल भक्तों को दर्शन देते हैं
बसंती कमरे को साल में एक बार ही खोला जाता है और पीले रंग, फूलों, और रंगीन वस्त्रों से सजाया जाता है. मंदिर में पीले वस्त्र पहले राधा रमणजी लाल भक्तों को दर्शन देते हैं. ये कमरा बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है और खुद प्रभु पीले वस्त्र पहनकर सृष्टि में खुशियां और उत्साह मनाने का संकेत देते हैं. कमरे को बहुत ही आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जिसमें बेल्जियम से लाए झूमर भी शामिल होते हैं और इसके साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाओं की छवियों को भी अंकित किया जाता है.
राधारमणजी को 56 भोज समर्पित किए जाते हैं
बसंती कमरे को खोलने के साथ ही राधारमणजी को 56 भोज समर्पित किए जाते हैं, जिसमें खास तौर पर पीले व्यंजनों को शामिल किया जाता है.
शाहजी मंदिर की बनावट बेहद अद्भुत है
शाहजी मंदिर की बनावट भी अपने आप में अद्भुत है. मंदिर के बाहर बने टेढ़े खंभे भक्तों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं. खंभों की बनावट किसी सांप की तरह दिखती है. मंदिर की दीवारों पर जटिल नक्काशी और शिल्प कला को दिखाती बेहतरीन पेंटिंग को दीवारों पर अलंकृत किया है. मंदिर में राजस्थानी, इटालियन, और बेल्जियम कला का नमूना देखने को मिलेगा.
किस सिंहासन पर बैठकर विश्राम करते हैं प्रभु
मंदिर को बेल्जियम के झूमरों से सुसज्जित किया गया है. मंदिर में एक बड़ा सिंहासन भी रखा है, जिस पर राधारमण जी साल में एक बार सावन के महीने में आने वाली शयनी एकादशी पर बैठते हैं. माना जाता है कि अब भगवान विष्णु, भगवान शिव को सृष्टि का भार सौंप कर निंद्रा में चले गए. प्रभु को सिंहासन पर बैठाना विश्राम का संकेत माना गया है.
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