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राहुल की वोटर अधिकार यात्रा के बीच जगतगुरु ने किसे बताया सनातन का सच्चा योद्धा!

राहुल गांधी इन दिनों पीएम मोदी की अब तक की जीत को वोट चोरी से जोड़ रहे हैं और इसी कथित चोरी के बीच संत समाज से आने वाले जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य है, जिन्होंने कांग्रेस की हक़ीक़त बताकर देश का सच्चा सनातनी चेहरा दिखा दिया है. ये पूरा मामला क्या है, इसी पर देखिये धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपोर्ट.

सावन आते ही मौसम ने करवट क्या ली, राजनीतिक तपिश बढ़ने लगी. इस साल के आखिर में बिहार का चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों का जोश हाई है और अपने इसी जोश में कांग्रेसी राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी का बिगुल बिहार के सासाराम से फूंक दिया है. पिछले से पिछले लोकसभा चुनाव में देश के चौकीदार को चोर कहना राहुल गांधी को इतना महंगा पड़ा था कि अदालत में न चाहते हुए भी माफी मांगनी पड़ी. अब एक बार फिर देश के इसी चौकीदार पर चोरी का आरोप लगा रहे हैं. पीएम मोदी की अब तक की जीत को वोट चोरी से जोड़ रहे हैं और इसी कथित चोरी के बीच संत समाज से आने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य हैं, जिन्होंने कांग्रेस की हकीकत बताकर देश का सच्चा सनातनी चेहरा दिखा दिया है. ये पूरा मामला क्या है, इसी पर देखिए धर्म ज्ञान की ये खास रिपोर्ट.

बिहार के सासाराम से वोट अधिकार यात्रा का शुभारंभ हो चुका है. राहुल गांधी का साथ देने लालू के लाल तेजस्वी यादव भी मैदान में हैं. कथित वोट चोरी के खिलाफ बिगुल फूंक चुकी कांग्रेस-आरजेडी, चुनाव आयोग और सरकार दोनों पर आक्रामक है. 16 दिनों तक चलने वाली यही यात्रा 20 से ज्यादा जिलों से गुजरेगी, 1300 किमी का सफर तय करेगी और 1 सितंबर के दिन इसका समापन होगा. लेकिन तब क्या होगा, जब वोट चोरी का मामला फर्जी निकलेगा क्योंकि वोट चोरी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग 7 दिनों की अंतिम चेतावनी दे चुका है. हलफनामा दायर करो या फिर देश से माफी मांगो. हालांकि राहुल-तेजस्वी की जोड़ी ये साबित करने में जुटी है कि पिछले बैक टू बैक चुनावों में वोट चोरी हुई है और अब बिहार में चुनाव चोरी नहीं करने देंगे. तभी तो लालू यादव भी नारा लगा चुके हैं, "चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए." अब जबकि इस लड़ाई के सरदार खुद राहुल गांधी हैं, इसलिए पीएम मोदी की बैक टू बैक जीत में उन्हें वोट चोरी नजर आने लगी है. हाल ही में राहुल ने देश के प्रधानमंत्री पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए ये कहा है. “अभी केवल मैंने इनकी चोरी पकड़ी है. आने वाले समय में पूरी देश की जनता इनसे इनकी चोरी पर सवाल करेगी. बिहार में यह S.I.R. करके वोटों की चोरी करना चाहते हैं. S.I.R. का मतलब है नए तरीके से चोरी करना. नरेंद्र मोदी चोरी करके चुनाव जीते हैं, लेकिन बिहार की जनता यहां इनकी चोरी नहीं चलने देगी.”

इस पूरे मामले को अगर राहुल गांधी की भाषा में समझें, तो भाजपा न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में चुनाव आयोग को गुमराह करके वोटों में हेराफेरी और वोट चोरी कराने में लगी है. जबकि ऐसा है या नहीं, इसका कांग्रेस के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं है. लेकिन इसी कथित वोट चोरी के बीच जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने देश को कांग्रेस का अतीत दिखाया है.

हाल ही में महाराष्ट्र के नेता और शिंदे शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा, जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य से मिलने वृंदावन पहुंचे. इस मुलाकात में उन्होंने जगतगुरु को साहित्यकार श्रीकांत वर्मा जी द्वारा लिखित प्रसिद्ध उपन्यास ‘मगध’ स्मृति स्वरूप भेंट किया. मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने बताया कि जगतगुरु को वह पितातुल्य मानते हैं और आज भी उनके मार्गदर्शन में रहकर सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं. हालांकि इस मुलाकात के बाद जगतगुरु की तरफ से जो बयान सामने आया, उसमें कांग्रेस पर सीधा कटाक्ष था.

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राजनीति से प्रेरित होकर डॉ. अभिषेक वर्मा को काफी प्रताड़ित किया गया. लेकिन जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने इस पर कहा कि जो लोग धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य करते हैं, उनके मार्ग स्वयं भगवान प्रशस्त करते हैं. डॉ. अभिषेक वर्मा को मेरा आशीर्वाद है, वह सनातन धर्म का सच्चा योद्धा है.

कांग्रेस सरकार में प्रताड़ना की बात कहना और वो भी जगतगुरु की ज़ुबान से, अपने आप में मायने रखती है. क्योंकि संत समाज से आने वाली यह शख़्सियत अनोखी है. आँखों की रोशनी के बिना भी जगतगुरु को 22 भाषाओं का ज्ञान है. अब तक 100 से अधिक ग्रंथ लिख चुके हैं और आज भी बतौर कथावाचक आम जनमानस को आध्यात्म से जोड़ रहे हैं.

विश्व पटल पर सनातन की खूबसूरती को असल पहचान दिलाने का श्रेय भी उन्हें जाता है. यही नहीं, पीएम मोदी के साथ उनकी मित्रता और आध्यात्मिक नज़दीकियाँ जगजाहिर हैं. उनकी कही गई कई भविष्यवाणियाँ, पीएम मोदी को लेकर, सच साबित हुई हैं. इन्हीं सब को देखते हुए आज अगर जगतगुरु कांग्रेस पर कटाक्ष करते हैं और अपने व्यक्तिगत विचार सामने रखते हैं, तो उन बातों के राजनीतिक मायने भी गहरे हैं.

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