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शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन : मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद, रोग-शोक और कष्टों को दूर करती हैं माता

मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है, जो शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की सृजनकर्ता शक्ति माना गया है. कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि में प्रकाश का संचार किया. इसी कारण उनका नाम कूष्मांडा पड़ा. भक्तों के बीच यह विश्वास है कि माता की उपासना करने से मन के भय दूर होते हैं और आत्मविश्वास तथा ऊर्जा में वृद्धि होती है.

Image Credits: X/@mansukhmandviya
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शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है.नवरात्र के इस पावन अवसर पर भक्त माता रानी की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी.इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. 

मां कूष्मांडा की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों को सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है.उनके आठ हाथ हैं, जिसके कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है.माता अपने सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं.वहीं, उनके आठवें हाथ में जपमाला सुशोभित होती है.मान्यता है कि यह जपमाला भक्तों को सिद्धियां और निधियां प्रदान करने का प्रतीक है.

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मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है

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मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है, जो शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है.पौराणिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की सृजनकर्ता शक्ति माना गया है.कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि में प्रकाश का संचार किया.इसी कारण उनका नाम कूष्मांडा पड़ा.भक्तों के बीच यह विश्वास है कि माता की उपासना करने से मन के भय दूर होते हैं और आत्मविश्वास तथा ऊर्जा में वृद्धि होती है.

मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा का ध्यान कर दीपक जलाया जाता है

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नवरात्र के चौथे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल की सफाई की जाती है.इसके बाद मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा का ध्यान कर दीपक जलाया जाता है.माता को पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं.इसके बाद श्रद्धालु मां के मंत्र का जाप कर परिवार की सुख-शांति और मंगलकामना के लिए प्रार्थना करते हैं.मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं- मंत्र: ऐं ह्रीं देव्यै नमः.

क्या करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है

मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्र जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.पूजा के बाद मां की आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है.धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को मालपुआ, दही और हलवे का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है.भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार माता को भोग लगाते हैं.इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जाता है.

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माता को रोग-शोक और कष्टों को दूर करने वाली देवी भी माना जाता है

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की उपासना करने से आयु, यश, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है.माता को रोग-शोक और कष्टों को दूर करने वाली देवी भी माना जाता है.भक्त उनसे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, परिवार को स्वस्थ रखने और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.शारदीय नवरात्र का चौथा दिन शक्ति, सकारात्मकता और सृजन का संदेश देता है.इस दिन मां कूष्मांडा की आराधना कर श्रद्धालु अपने जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और खुशहाली की कामना करते हैं.

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