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मुस्कान-साहिल के लिए मौत की सजा लिखने के बाद जज ने कचरे में फेंका पेन, महाभारत की कौनसी पंक्तियां दोहराईं
मेरठ की मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को सजा सुनाने वाले जज ने सजा लिखने के बाद जो किया उसकी भी कम चर्चा नहीं हो रही है. उन्होंने पेन की निब नहीं तोड़ी बल्कि पेन को कचरे में फेंक दिया. इसी के साथ बड़ी टिप्पणी की. जिसका संदर्भ महाभारत से लिया.
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पति की हत्यारिन मेरठ के नीले ड्रम वाली मुस्कान को फांसी की सजा मिल चुकी है. होता ये है कि दोषी के लिए जिस पेन से फांसी की सजा लिखी जाती है उसकी निब तोड़ दी जाती है, लेकिन मेरठ की मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को सजा सुनाने वाले जज ने सजा लिखने के बाद जो किया उसकी भी कम चर्चा नहीं हो रही है.
मेरठ की जिला अदालत में मुस्कान और साहिल की सजा तय की गई है. न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II ने दोनों को मौत की सजा मुकर्रर की. इसके साथ ही जज साहब ने जिस पेन से सजा लिखी उसे तोड़ा नहीं बल्कि तुरंत कूड़ेदान में फेंक दिया. जज अरविंद कुमार मिश्र के इस सख्त और अनोखे अंदाज की चर्चा हो रही है.
सजा सुनाते वक्त महाभारत की पंक्तियां सुनाईं
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जज अरविंद मिश्रा जब फैसला सुनाने के लिए सीट पर बैठे तब महाभारत की पंक्ति दोहराईं.
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‘अपराधी को उसके अपराध की गंभीरता के मुताबिक दंड देना ही न्यायिक धर्म है.’
इस दौरान न्यायाधीश ने जंगल से जुड़ी मिसाल भी दी. उन्होंने कहा, अगर बाघ जंगल में है, तो जंगल सुरक्षित है और अगर जंगल बचा है, तो बाघ भी सुरक्षित है. कानून मनुष्य के लिए बनाया गया है, जो इंसानों की सुरक्षा करता है और उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है. इसलिए समाज में इसका कड़ा संदेश जाना बहुत जरूरी है. जज अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा,
‘मुस्कान-साहिल आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है. इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी.’
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कौन हैं मुस्कान-साहिल को सजा सुनाने वाले जज?
2 जुलाई 1971 को UP के मऊ में जन्में अरविंद कुमार मिश्रा-II ने BA, LLB और LLM की पढ़ाई की है. 31 मई, 2003 को उन्होंने न्यायिक सेवा में सिविल जज के रूप में करियर शुरू किया. अपने 23 साल के न्यायिक कार्यकाल में उन्होंने गाजीपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और मिर्जापुर समेत कई जिलों में कार्यभार संभाला. 21 मई 2026 में उन्होंने मेरठ जिला अदालत में तैनाती मिली.
अदालत की कार्यवाही के दौरान दोनों दोषी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. सजा सुनाए जाने के समय मुस्कान और साहिल चुप रहे, बाद में जब फांसी के बारे में सुना तो फफक पड़े.
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मुस्कान-साहिल केस की टाइमलाइन
- मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की लाश एक नीले प्लास्टिक के ड्रम से बरामद हुई थी
- 3 मार्च को मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी
- पति की हत्या के बाद मुस्कान साहिल के साथ 13 दिन तक शिमला-मनाली घूमती रही
- 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा, उसने मुस्कान को साहिल के साथ देखा
- राहुल ने सौरभ के बारे में पूछा तो मुस्कान कोई जवाब नहीं दे सकी, इसके बाद सारा भेद खुल गया
- पुलिस ने 19 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था
- मामले की सुनवाई के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए
- 30 सितंबर को जिला जज अरविंद कुमार की अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था
सौरभ ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर साल 2016 में मुस्कान से शादी की थी. साल 2019 में मुस्कान ने एक बेटी को भी जन्म दिया. सौरभ विदेश में नौकरी करता था. वह परिवार से मिलने आया करता था, लेकिन इस बीच मुस्कान की नजदीकियां साहिल से बढ़ने लगीं. आखिरी बार सौरभ 24 फरवरी 2025 में बेटी का जन्मदिन मनाने लंदन से आया था. दोनों ने धूमधाम से बेटी का जन्मदिन मनाया, हालांकि उस दौरान मुस्कान ने सौरभ को अपने इरादों की भनक तक नहीं लगने दी. उसने 3 मार्च को ब्वॉयफ्रेंड साहिल के साथ मिलकर सौरभ की बेरहमी से हत्या की. फिर शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में पैक कर दिया ऊपर से सीमेंट भर दी. इस हत्याकांड ने देशभर में सनसनी मचा दी थी.
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