चीनी बादशाहत खत्म करने की तैयारी...रॉकेट हुआ भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात, पहली बार ₹4.15 लाख करोड़ के पार
मोदी सरकार की PLI नीति ने कमाल कर दिया है. भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2025 में 37% बढ़कर रिकॉर्ड 47 अरब डॉलर अधिक हो गया है. भारत बहुत तेजी से चीनी बादशाहत माने जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट मेकिंग में सबसे बड़े मैन्युफैक्चरर के रूप में उभर रहा है.
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भारत अर्थव्यवस्था और मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर कमाल कर रहा है. बदले वैश्विक हालात और कोरोना काल में आई सप्लाई चेन की दिक्कतों को भारत ने बखूबी फायदा उठाया और कमाल कर दिया. एक समय चीनी प्रभुत्व वाला माने जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी नित नई ऊंचाईयों को छू रहा है. सरकार की मेक अन इंडिया की नीति और PLI स्कीम ने देश को दुनिया के टॉप इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर वाले देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है.
आपको बता दें कि साल 2025 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने पहली बार 47 अरब डॉलर यानी 4.15 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है, जो भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2024 के पिछले 12 महीनों में यह निर्यात 34.93 अरब डॉलर था, जो 2025 में काफी बढ़ गया.
स्मार्टफोन निर्यात का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में बादशाहत
कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा, यानी करीब 30 अरब डॉलर, स्मार्टफोन के निर्यात से आया है. इसमें सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना की अहम भूमिका रही है. स्मार्टफोन निर्यात भी 2025 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
दुनिया भर में बढ़ी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग
दिसंबर 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 4.17 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर 2024 के 3.58 अरब डॉलर की तुलना में 16.8 प्रतिशत ज्यादा है. साल 2025 के 12 महीनों में से 7 महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 4 अरब डॉलर से अधिक रहा. इससे साफ पता चलता है कि भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुनिया भर में लगातार मांग बनी हुई है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में स्मार्टफोन निर्यात का आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में हुए कुल स्मार्टफोन निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत है.
चार साल में 79.03 अरब डॉलर का रहा निर्यात
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2021 से 2025 के बीच भारत से स्मार्टफोन का कुल निर्यात करीब 79.03 अरब डॉलर रहा, जिसमें साल 2025 सबसे ज्यादा निर्यात वाला साल रहा. इस दौरान एप्पल कंपनी के आईफोन का हिस्सा करीब 75 प्रतिशत रहा, जिसकी कीमत 22 अरब डॉलर से ज्यादा थी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने से आने वाले समय में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि साल 2026 में यह तेजी और बढ़ेगी, क्योंकि चार सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह से उत्पादन शुरू करने वाले हैं. सरकारी अनुमान के अनुसार, 2024-25 के दौरान भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन करीब 11.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में देश में उत्पादन शुरू होने के बाद पहली बार 2025 में भारत से आईफोन का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत ज्यादा है.
भारत दूनिया का दूसरा सबसे बड़ा फोन निर्माता
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है. देश में बिकने वाले 99 प्रतिशत से ज्यादा मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं, जिससे भारत मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है. स्मार्टफोन पीएलआई योजना मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है, हालांकि खबर है कि सरकार इस योजना को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रही है.
IMF ने बढ़ाया भारत के विकास दर का अनुमान
वॉशिंगटन, 19 जनवरी (आईएएनएस). अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सोमवार को साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है. यह अनुमान पहले की तुलना में 0.7 प्रतिशत ज्यादा है. आईएमएफ ने इसके पीछे की वजह साल के दूसरे हिस्से में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन को बताया है.
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी में शामिल
आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार के चलते भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया गया है. इससे यह भी साफ होता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है.
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हालांकि, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर में थोड़ी कमी आ सकती है. अनुमान के मुताबिक, साल 2026 और 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है. इस दौरान IMF ने भारत को दुनिया के ग्रोथ का इंजन करार दिया है.
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