वैश्विक मंदी के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तूफानी उछाल, 7 दिन में $14 बिलियन की बढ़ोतरी, कैसे हुआ ये कमाल?

India Forex Reserve: वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं, ट्रेड और टैरिफ को लेकर जारी उठापटक के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार रॉकेट हो गया है. लंबे समय बाद देश के फॉरेक्स रिजर्व में जबरदस्त उछाल आया है. इससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत संकेत दिए हैं, बल्कि पूरी दुनिया के निवेशकों का भारतीय बाजार के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है.

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24 Jan 2026
( Updated: 24 Jan 2026
12:00 PM )
वैश्विक मंदी के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तूफानी उछाल, 7 दिन में $14 बिलियन की बढ़ोतरी, कैसे हुआ ये कमाल?
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल (सांकेतिक तस्वीर)

वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक मंदी और अनिश्चितता के बीच भारत विकास और व्यापार के मोर्चे पर नई ऊंचाईयों को छू रहा है और नए मापदंड स्थापित कर रहा है. एक ओर जहां टैरिफ की वजह से ट्रेड में समस्याएं आ रही हैं और मुद्रा भंडार घट रहा है उस वक्त भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तूफानी उछाल देखने को मिला है. 16 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में यह 14.167 बिलियन डॉलर बढ़कर 701.360 बिलियन डॉलर हो गया है.  

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड उछाल

जानकारी के मुताबिक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने के भंडार में तेज बढ़त के चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में 14.17 अरब डॉलर बढ़ गया. यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति फिलहाल काफी मजबूत नजर आ रही है.

इससे पहले 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 392 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई थी. विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) में 16 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 9.652 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है और इनकी वैल्यू बढ़कर 560.518 बिलियन डॉलर की हो गई है.

एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में व्यक्त किया जाता है. वहीं, गोल्ड की वैल्यू 4.623 बिलियन डॉलर बढ़कर 117.454 बिलियन डॉलर हो गई है.

सितंबर 2024 में ऑल-टाइम हाई पर था देश का विदेशी मुद्रा भंडार 

आरबीआई के मुताबिक, 16 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 35 मिलियन डॉलर कम होकर 18.704 बिलियन डॉलर हो गई है. आईएमएफ में रिसर्व पॉजिशन की वैल्यू 73 मिलियन डॉलर कम होकर 4.684 बिलियन डॉलर हो गई है. इससे पहले 17 अक्टूबर 2025 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 702.25 बिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुंच था. देश के विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 704.89 बिलियन डॉलर जो कि सितंबर 2024 में बना था.

सोना में भी रिकॉर्ड उछाल

देश के स्वर्ण भंडार ने भी इस हफ्ते शानदार प्रदर्शन किया. इसमें 4.623 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और कुल सोना भंडार 117.454 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह दिखाता है कि अनिश्चित वैश्विक हालात में सोना अब भी एक भरोसेमंद संपत्ति बना हुआ है.

विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल के मायने

किसी भी देश की लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है. इससे अलावा यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है. उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है.

देश की अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेत

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बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी दिखाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है और यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है. साथ ही इसके बढ़ने से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना भी आसान हो जाता है. आपको बता दें कि वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच देश के फॉरेक्स भंडार में बढ़ोतरी आर्थिक मजबूती के महत्वपूर्ण संकेत हैं. ऐसे माहौल में विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना देश के लिए एक सेफ्टी कुशन की तरह काम करता है.

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