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कहां बनेगा 'खाटू श्याम बाबा' की माता मौरवी का मंदिर, 500 करोड़ किए जाएंगे खर्च, देखने लायक होगी भव्यता

खाटू श्याम बाबा के दरबार में रोजाना भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, दूर-दूर से भक्त बाबा का आशीर्वाद लेने आते हैं. अब जिले के पिपराली स्थित लखीपुरा में आस्था का नया अध्याय शुरु होने जा रहा है, दरअसल यहां दो हेक्टेयर ज़मीन पर खाटू श्याम बाबा यानि बर्बरीक की माता मौरवी का शक्तिपीठ बनाया जाएगा.

कहां बनेगा 'खाटू श्याम बाबा' की माता मौरवी का मंदिर, 500 करोड़ किए जाएंगे खर्च, देखने लायक होगी भव्यता
Image Credits: https://shreeshyammatamorvimandir.org
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राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम बाबा का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, बाबा के दर्शन करने के लिए लोग कोने-कोने से आते हैं, लोगों में उनकी अटूट आस्था है. तभी तो उन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है. खाटू श्याम बाबा के दरबार में रोजाना भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, दूर-दूर से भक्त बाबा का आशीर्वाद लेने आते हैं. अब जिले के पिपराली स्थित लखीपुरा में आस्था का नया अध्याय शुरु होने जा रहा है, दरअसल यहां दो हेक्टेयर ज़मीन पर खाटू श्याम बाबा यानि बर्बरीक की माता मौरवी का शक्तिपीठ बनाया जाएगा. 

मंदिर में बाबा के पूरे शरीर वाले स्वरूप को दिखाया जाएगा

राजस्थान के सीकर में खाटू श्याम की माता माता मौरवी को समर्पित ये भव्य मंदिर काफी ख़ास होने वाला है. दरअसल पारंपरिक मूर्तिकला से हटकर, बनने जा रहे इस माता मौरवी शक्तिपीठ में उनके बेटे, बर्बरीक (खाटू श्याम बाबा) की पूरी शरीर वाली मूर्ति (पूर्ण देह स्वरूप) भी खास तौर पर स्थापित की जाएगी. 

खाटू श्याम की पारंपरिक पूजा मुख्य रूप से बर्बरीक के शीश कटे हुए सिर पर केंद्रित होती है. बनने जा रहा मौरवी शक्तिपीठ उन चुनिंदा प्रमुख स्थलों में से एक होगा जहाँ उनकी माँ के साथ-साथ उनके पूरे शरीर वाले स्वरूप को भी दिखाया जाएगा. यहां उनके शीश दान से पहले के माता-पुत्र संबधों, संस्कारों और शौर्य की गाथा भी देखने तो मिलेगी. 


मंदिर को बनाने में 500 करोड़ होंगे खर्च

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इस भव्य मंदिर को बनाने में 500 करोड़ की लागत लगने वाली है.  योजना में 108 फुट ऊँचा मुख्य मंदिर बनाया जाएगा जिसकी लागत 120 करोड़ बताई जा रही है, एक विशाल सत्संग भवन, 100 कमरों तक का आवासीय परिसर/धर्मशाला, एक बड़ा अन्न-क्षेत्र (सामुदायिक रसोई) और एक समर्पित गौशाला शामिल हैं. ब्रह्मलीन संत श्रीचंद महाराज की दान दी गई जमीन पर ये मंदिर सिर्फ केंद्र में नहीं, बल्कि आधुनिक डिजिटल गैलरी, वैदिक संस्कार शाला, औषधीय उद्यान और चैरीटेबल ट्रस्ट का हब बनेगा

नवंबर में मंदिर का भूमि पूजन होगा

नवंबर में मंदिर का भूमि पूजन होगा. सनातन धर्म रक्षा अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर और माता मौरवी शक्किपीठ के पीठाधीश्वर डॉक्टर दीनदयाल परियोजना का नेतृत्व करेंगे. परियोजना के लिए जयपुर के सिविल लाइंस में माता मौरवी की अखंड ज्योति जला दी गई है. 


अखंड ज्योति को लखीपुरा शक्तिपीठ में स्थापित किया जाएगा

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बताया जा रहा है कि ये ज्योति खास रूप से माता मौरवी मंदिर और माता मौरवी शक्तिपीठ के लिए जलाई गई है. जब मंदिर बन जाएगा और प्रतिमा की प्रतिष्ठा हो जाएगी तो इस पावन अखंड ज्योति को लखीपुरा शक्तिपीठ में स्थापित किया जाएगा. इस प्रजोक्ट से सूएई, यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर समेत 10 देशों और 18 राज्यों के 111 शहरों के प्रतिनिधि जुड़ रहे हैं.खाटूधाम, सालासर और जीणमाता के धार्मिक क्षेत्र में नया शक्तिपीठ जुड़ने से शेखावाटी में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या 40 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय होटल, हस्तशिल्प, ट्रांसपोर्ट और छोटे कारोबारों को फायदा होगा।

क्यों हारे का सहारा कहलाए खाटू श्याम बाबा?

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हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, बर्बरीक (भीम के पोते) ने अपनी माँ मौरवी को वचन दिया था कि वो महाभारत युद्ध में हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे. मां को दिए इसी वचन की वजह से वो ‘हारे का सहारा’ कहलाए. उनके महान बलिदान (शीश दान) का सम्मान करते हुए, भगवान कृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलयुग में उनकी पूजा उनके अपने नाम श्याम से की जाएगी.  

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