केरल में कांग्रेस का नहीं CPIM का होगा CM...सोनिया गांधी के करीबी मणिशंकर अय्यर की दावे पर बवाल, बैकफुट पर पूरी पार्टी!
केरल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत तेज हो गई है. सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस वक्त झटका लगा, जब वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने दावा किया कि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन फिर सत्ता में लौटेंगे.
केरल में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और इससे पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है. सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. जो यह बताता है कीं कांग्रेस को अभी अपने विपक्षी दलों से नहीं बल्कि पार्टी के भीतर नेताओं के विचार लड़ना पड़ेगा.
दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने दावा किया कि केरल में मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन एक बार फिर सत्ता में लौटेंगे. उनके इस बयान ने कांग्रेस खेमे में असहजता पैदा कर दी है, क्योंकि पार्टी खुद राज्य में 10 साल का सत्ता सूखा खत्म करने की कोशिश कर रही है.
क्या कहा मणिशंकर अय्यर ने?
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि पिनराई विजयन दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने केरल की पंचायती व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य को देश का सबसे मजबूत पंचायती मॉडल बनाने की दिशा में और सुधार किए जाने चाहिए. उनके अनुसार केरल ने स्थानीय स्वशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है. उन्होंने यह भी कहा कि केरल कई मामलों में देश के अन्य राज्यों से आगे है और प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत ढांचा तैयार किया गया है. अय्यर की इस टिप्पणी को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
कांग्रेस ने बयान से बनाई दूरी
अय्यर के बयान के बाद कांग्रेस ने तुरंत सफाई दी. पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि अय्यर अपनी व्यक्तिगत क्षमता में बयान देते हैं और पार्टी की आधिकारिक राय अलग है. इस बयान से साफ संकेत मिला कि कांग्रेस किसी भी तरह का भ्रम पैदा नहीं होने देना चाहती, खासकर ऐसे समय में जब चुनाव सिर पर हैं.
कांग्रेस की चुनौती और सियासी समीकरण
केरल में इस समय वाम दलों के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है. वाम मोर्चा लगातार दो कार्यकाल से शासन कर रहा है. कांग्रेस राज्य में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रही है और आगामी चुनाव में वापसी की पूरी कोशिश कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अय्यर का बयान विपक्षी रणनीति के लिहाज से असहज स्थिति पैदा कर सकता है. चुनावी माहौल में ऐसे बयान संदेशों को भ्रमित कर सकते हैं और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल सकते हैं.
बताते चलें कि केरल की राजनीति में आने वाले महीनों में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है. कांग्रेस जहां संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं सत्तारूढ़ दल अपनी उपलब्धियों के दम पर दोबारा जनादेश मांग रहा है. मणिशंकर अय्यर का बयान भले ही व्यक्तिगत बताया जा रहा हो, लेकिन उसने चुनावी चर्चा को नई दिशा दे दी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस इस स्थिति को किस तरह संभालती है और केरल की जनता किसे अपना अगला जनादेश देती है.
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