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अपने ही जाल में फंसे ट्रंप! टैरिफ लगाना पड़ गया भारी, अमेरिका में बेतहाशा बढ़ रही महंगाई

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती महंगाई की वजह घरेलू मांग नहीं, बल्कि आयात पर लगाए गए टैरिफ हैं. उन्होंने बताया कि वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में महंगाई धीरे-धीरे कम हो रही है.

अपने ही जाल में फंसे ट्रंप! टैरिफ लगाना पड़ गया भारी, अमेरिका में बेतहाशा बढ़ रही महंगाई
Donald Trump (File Photo)

अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाली कहावत अमेरिका पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है. इसका कारण यह है कि अमेरिका में महंगाई बढ़ती जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के तमाम देशों पर दबाव बनाने और अपनी बात मनवाने के लिए भारी भरकम टैरिफ लगाए, लेकिन इसका असर सीधे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है.

दरअसल, अमेरिका में बढ़ती महंगाई को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है. इस बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने इस पर साफ तस्वीर पेश की है. पॉवेल के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह घरेलू मांग नहीं, बल्कि आयात किए जाने वाले सामान पर लगाए गए भारी टैरिफ हैं.

दुनियाभर की अमेरिका पर नजर 

पॉवेल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका की व्यापार नीतियों और उनके वैश्विक असर पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि हालिया महंगाई के ऊंचे आंकड़े ज्यादातर वस्तु क्षेत्र में बढ़ी कीमतों को दिखाते हैं और यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर टैरिफ के असर से जुड़ी हुई है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सेवाओं के क्षेत्र में कीमतों का दबाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है.

अमेरिका पर टैरिफ का कैसा पड़ा असर?

इसी बैठक में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने ब्याज दरों को फिलहाल 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही बनाए रखने का फैसला किया. पॉवेल ने कहा कि मौजूदा मौद्रिक नीति फिलहाल सही दिशा में है, क्योंकि महंगाई अभी भी फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. उन्होंने बताया कि टैरिफ का बड़ा असर अब तक अर्थव्यवस्था में दिख चुका है. पॉवेल के अनुसार, टैरिफ आम तौर पर एक बार की कीमत बढ़ोतरी की तरह काम करते हैं. शुरुआत में इससे महंगाई तेजी से ऊपर जाती है, लेकिन समय के साथ इसका असर कमजोर पड़ने लगता है. उन्होंने कहा कि जहां व्यापार उपायों की वजह से वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हुआ है, वहीं सेवाओं के क्षेत्र में एक अलग रुझान नजर आ रहा है. सेवाओं से जुड़ी महंगाई में लगातार नरमी देखने को मिल रही है.

महंगाई को लेकर बाजारों की उम्मीदें स्थिर

महंगाई के ताजा आंकड़ों का जिक्र करते हुए पॉवेल ने बताया कि दिसंबर तक के 12 महीनों में कोर पीसीई महंगाई 3.0 प्रतिशत रही, जबकि कुल पीसीई महंगाई 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई. उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों और वित्तीय बाजारों की महंगाई को लेकर उम्मीदें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं. ज्यादातर दीर्घकालिक अनुमान अब भी फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास हैं.

नए टैरिफ के ऐलान से मुश्किल में आ जाएगा अमेरिका 

पॉवेल ने आगे कहा कि फेडरल रिजर्व बैंक यह बारीकी से निगरानी कर रहा है कि टैरिफ से जुड़ी कीमतों में बढ़ोतरी आगे कैसे बदलती है. उनका मानना है कि अगर कोई नया बड़ा टैरिफ नहीं लगाया गया, तो वस्तुओं में महंगाई पहले अपने चरम पर पहुंचेगी और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगेगी. उन्होंने यह भी साफ किया कि फेड की मौद्रिक नीति किसी तय समय सारिणी पर नहीं चलती. हर बैठक में आर्थिक हालात का आकलन कर आगे का फैसला लिया जाएगा.

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बहरहाल, फेडरल रिजर्व के संकेत यह बताते हैं कि अमेरिका में महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और इसका बड़ा कारण टैरिफ नीति बनी हुई है. आने वाले समय में अगर व्यापार शुल्क को लेकर कोई नया फैसला लिया गया, तो इसका सीधा असर कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है. ऐसे में फेड की हर अगली बैठक और नीति निर्णय बाजारों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं.

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