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योगी को चुनौती देने से पहले सपा-कांग्रेस में तकरार! कहीं चुनाव से पहले ही न खुल जाए गठबंधन की गांठ

यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान तेज है. कांग्रेस ने 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की सूची साझा की है, जबकि सपा मजबूत उम्मीदवारों की जानकारी मांग रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हैं.

Image Source: IANS
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 उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सीटों का सवाल चर्चा में है. आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चुनौती देने और योगी आदित्यानाथ के विजयरथ को रोकने के लिए दोनों दलों के साथ आने की बात हो रही है, लेकिन चुनावी तालमेल से पहले सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा है. कांग्रेस की ओर से 180 सीटों की सूची साझा किए जाने और समाजवादी पार्टी की ओर से मजबूत उम्मीदवारों पर जोर दिए जाने के बाद दोनों दलों के बीच बातचीत को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. जिसे देखकर यह क़यास लग रहे हैं कि गठबंधन की गांठ चुनाव से पहले कहीं खुल ना जाए. 

180 सीटों की सूची पर क्यों बढ़ी चर्चा?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं. ऐसे में कांग्रेस की ओर से 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताने की खबर ने गठबंधन की बातचीत को अहम मोड़ पर ला दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस पहले उन सीटों और उम्मीदवारों की जानकारी दे, जहां उसकी जीत की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि सीटों की संख्या से ज्यादा जरूरी उन सीटों की स्थिति और उम्मीदवारों की गुणवत्ता है. पार्टी की ओर से साझा की गई सूची को अंतिम फैसला नहीं, बल्कि बातचीत की शुरुआत बताया गया है. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि दोनों दल आपसी सहमति से कितनी सीटों पर समझौता कर पाते हैं.

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प्रियंका गांधी के सामने भी उठा सीट बंटवारे का मुद्दा

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर हुई चाय बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी के सामने सीटों की सूची का मुद्दा उठाया था. बताया गया कि उन्होंने कांग्रेस से उन सीटों की जानकारी देने को कहा, जिन पर पार्टी चुनाव लड़ना चाहती है. इस पर प्रियंका गांधी ने सूची साझा करने का आश्वासन दिया था. इसी बातचीत में प्रियंका गांधी ने सीटों की संख्या के बजाय उनकी मजबूती पर ध्यान देने की बात कही. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट किया कि 180 सीटों की सूची अंतिम निर्णय नहीं है. दोनों दल बातचीत के जरिए सीटों की संख्या कम-ज्यादा कर सकते हैं. यहां तक कि 80 से 90 सीटों पर भी सहमति बनने की संभावना का जिक्र किया गया.

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कांग्रेस का अपना सर्वे, सपा को उम्मीदवारों की चिंता

कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों के हवाले से आई खबरों में बताया गया है कि पार्टी ने सीटों को A, B, C और D जैसी श्रेणियों में बांटा है. इस वर्गीकरण के पीछे आंतरिक सर्वे और सीटों पर पार्टी की स्थिति का आकलन बताया जा रहा है. कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भी राज्य में कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की जरूरत जताई थी. हालांकि, समाजवादी पार्टी की चिंता यह है कि गठबंधन में ऐसी सीटों पर समझौता न हो जाए, जहां कांग्रेस के उम्मीदवारों की स्थिति कमजोर हो. सपा नेताओं का मानना बताया जा रहा है कि यदि उम्मीदवारों के चयन में सावधानी नहीं बरती गई, तो इसका असर गठबंधन के प्रदर्शन पर पड़ सकता है. वहीं, कांग्रेस सभी संभावित उम्मीदवारों की सूची दूसरी पार्टी को सौंपने के पक्ष में नहीं दिख रही है.

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2022 के नतीजे भी बने चर्चा की वजह

पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे भी इस बातचीत के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं. वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी. पार्टी ने उस चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की बात पर भी जोर दिया था. इसके मुकाबले समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं. इन्हीं पुराने नतीजों के कारण सीटों के बंटवारे में उम्मीदवारों की मजबूती और चुनावी प्रदर्शन का सवाल अहम बना हुआ है. हालांकि, पिछला चुनाव भविष्य के नतीजों की गारंटी नहीं देता.

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बहरहाल, सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम समझौते की स्थिति स्पष्ट नहीं है. दोनों दलों के सामने अपने संगठन की अपेक्षाओं और गठबंधन की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. आने वाले दिनों में बातचीत किस दिशा में बढ़ती है, यह तय करेगा कि सीटों की संख्या पर सहमति कितनी जल्दी बनती है. 

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