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कोयला तस्करी केस में ED की बड़ी कार्रवाई... I-PAC से जुड़े ठिकानों पर दिल्ली, बेंगलुरु समेत कई शहरों में छापेमारी

पश्चिम बंगाल कोयला तस्करी मामले में ED ने I-PAC और ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में छापेमारी शुरू कर दी है. एजेंसी को कोयला तस्करी से जुड़े पैसों के सुराग मिले हैं और यह जांच रही है कि उनका इस्तेमाल राजनीतिक या अन्य गतिविधियों में हुआ या नहीं.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चर्चित कोयला तस्करी मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस केस में नई कार्रवाई शुरू करते हुए देश के कई बड़े शहरों में छापेमारी की है. जांच एजेंसी की टीमें इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर एक साथ पहुंची हैं. यह कार्रवाई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक साथ चल रही है, जिससे राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है.

सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु में I-PAC से जुड़े ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर भी ED की टीम मौजूद है. माना जा रहा है कि एजेंसी को कुछ अहम सुराग मिले हैं, जिनके जरिए कोयला तस्करी से जुड़े पैसों के इस्तेमाल का पता लगाया जा रहा है. जांच का फोकस इस बात पर है कि कहीं इस अवैध कमाई का उपयोग राजनीतिक रणनीति या मैनेजमेंट में तो नहीं किया गया. ऋषि राज सिंह का नाम सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, वह I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर हैं और संगठन के शुरुआती सदस्यों में गिने जाते हैं. पर्दे के पीछे रहकर रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. ऐसे में उनके ठिकानों पर छापेमारी को काफी अहम माना जा रहा है.

पहले भी ED के निशाने पर रहा है I-PAC

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यह पहली बार नहीं है जब I-PAC जांच एजेंसियों के दायरे में आया हो. इससे पहले भी कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी हो चुकी है. उस समय भी मामला कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से ही जुड़ा था. ED ने आरोप लगाया था कि कुछ संस्थाओं के जरिए हवाला के पैसे को आगे बढ़ाया गया, जिसमें I-PAC का नाम भी सामने आया. जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला तस्करी से कमाए गए पैसों का एक हिस्सा शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया. इसी दौरान शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनियों का नाम भी सामने आया था. आरोप यह भी है कि एक हवाला ऑपरेटर के जरिए करोड़ों रुपये I-PAC तक पहुंचाए गए.

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राजनीति में भी मचा था बवाल

इस मामले ने पहले भी पश्चिम बंगाल की राजनीति को गर्म कर दिया था. उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थीं. उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई अमित शाह के इशारे पर की जा रही है. इतना ही नहीं, उस दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा था, जिसमें ममता बनर्जी के हाथ में एक ग्रीन फाइल नजर आई थी. इसके बाद वह I-PAC के दफ्तर भी पहुंची थीं. कुछ ही देर में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी फाइलें लेकर बाहर निकलते दिखे, जिससे पूरे घटनाक्रम ने और रहस्य पैदा कर दिया.

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फिलहाल, ED की यह ताजा कार्रवाई कई बड़े सवाल खड़े कर रही है. दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक चल रही इस छापेमारी से साफ है कि जांच एजेंसी इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर जांच में ठोस सबूत मिलते हैं, तो इसका असर सिर्फ कानूनी ही नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है. फिलहाल सभी की नजर ED की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है.

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