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UP में सत्ता की जंग का सेमीफाइनल आज, 11 MLC सीटों पर BJP- सपा ने झोंकी ताकत, 72 जिलों में शुरू हुई वोटिंग
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सेमीफाइनल माने जा रहे विधान परिषद की 11 सीटों पर शुक्रवार को मतदान जारी है. बीजेपी और सपा ने पूरी ताकत झोंक दी है. नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित होंगे. वहीं, बिहार की 8, कर्नाटक की 4 और महाराष्ट्र की 5 सीटों पर भी आज वोटिंग हो रही है.
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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले सेमीफ़ाइनल के तौर पर आज (शुक्रवार को ) प्रदेश के विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान जारी है. विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इन चुनावों को राजनीतिक दलों के लिए काफी अहम माना जा रहा है इस चुनाव के नतीजों से प्रदेश की सियासत में बड़ा राजनीतिक संदेश जा सकता है. बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली, वहीं समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही.
इस चुनाव में केवल 11 सीटें दांव पर हैं, लेकिन दोनों प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रचार के दौरान मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सक्रियता ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान के बाद भी सियासी माहौल गर्म रहा. अब सबकी नजर मतदान और आगामी मतगणना पर टिकी है. चुनाव आयोग के ऐलान के मुताबिक, 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे. जानकारी देते चलें कि यूपी के अलावा बिहार की 8, कर्नाटक की 4 और महाराष्ट्र की 5 सीटों के लिए भी आज वोटिंग हो रही है.
14 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला
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इस चुनाव में कुल 11 सीटों में पांच खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, कुल 14.18 लाख मतदाता 152 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. मतदान उत्तर प्रदेश के 75 में से 72 जिलों में कराया जा रहा है. कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में पहले ही मतदान हो चुका है. मतदान को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक इंतजाम किए हैं. चुनाव की निगरानी के लिए 11 प्रेक्षकों की तैनाती की गई है. इसके अलावा 1,041 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 456 जोनल मजिस्ट्रेट भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. प्रशासन का जोर मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने पर है.
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सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान सुबह 8 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा. पूरे प्रदेश में मतदान के लिए 2,697 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. चुनाव प्रक्रिया में 12,309 मतदान कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है. सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए भारी और हल्के वाहनों को भी चुनाव कार्य में लगाया गया है. मतदान केंद्रों पर माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती के साथ वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की गई है. इन इंतजामों का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया पर नजर रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम करना है. प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मतदाताओं को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो.
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इन निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहा चुनाव
खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं. वहीं, खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शामिल हैं. मतदाताओं को मतदान केंद्र पर अपनी पहचान साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज साथ रखने चाहिए. यदि फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, तो निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन कार्ड और विश्वविद्यालय से जारी डिग्री या डिप्लोमा का मूल प्रमाणपत्र शामिल हो सकते हैं. मतदान से पहले संबंधित निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों की पुष्टि करना उचित रहेगा. अगर बात पीएमोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की करें तो स सीट पर बीजेपी अपनी कोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने की जुगत में है, क्योंकि इस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पिछले चुनाव में सपा के आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के सिटिंग एमएलसी केदार नाथ सिंह को हराया था. वहीं इस बार भी सपा-और बीजेपी ने अपने इन दोनों ही नेताओं को मौक़ा दिया है.
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नाम में गलती होने पर भी पात्र मतदाता को नहीं रोका जाएगा
चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम की मामूली लिपिकीय गलती को लेकर भी निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देशों के अनुसार, केवल ऐसी त्रुटि के आधार पर किसी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद पीठासीन अधिकारी नियमानुसार मतदान की अनुमति दे सकते हैं. मतदान वाले जिलों में शिकायतों के निपटारे के लिए कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं. यदि किसी पात्र मतदाता को केवल नाम की लिपिकीय त्रुटि के कारण वोट डालने से रोका जाता है, तो इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जा सकती है. ऐसे मामलों में जिलाधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है.
नतीजों पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर
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उत्तर प्रदेश की इन 11 एमएलसी सीटों पर हो रहा मतदान राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले के चलते चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है. हालांकि, इन सीटों के परिणामों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन नतीजे दोनों दलों के संगठन और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा जरूर बढ़ा सकते हैं.
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बहरहाल, मतदाताओं के वोट डालने के साथ उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला मतपेटियों में दर्ज हो रहा है. अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर है, जब साफ होगा कि विधान परिषद की इन सीटों पर किस दल को कितनी सफलता मिलती है.