जगदीप धनखड़ ने पेंशन के लिए किया अप्लाई, राजस्थान विधानसभा से मिली मंजूरी तो खाते में आएंगे इतने रूपये

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पेंशन के लिए आवेदन किया है. धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन के लिए अर्जी दी है. उन्होंने 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से विधायक के रूप में कार्य किया था. विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर कार्यवाही शुरू कर दी है.

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30 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:48 PM )
जगदीप धनखड़ ने पेंशन के लिए किया अप्लाई, राजस्थान विधानसभा से मिली मंजूरी तो खाते में आएंगे इतने रूपये

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन पाने के लिए आवेदन किया है. धनखड़ 1993 से 1998 तक अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र से विधायक रहे थे. 

जगदीप धनखड़ ने दी पेंशन के लिए औपचारिक अर्जी 

उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अब जगदीप धनखड़ ने पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन के लिए औपचारिक अर्जी दी है. विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर प्रक्रिया शुरू कर दी है. विधानसभा सचिवालय सूत्रों के अनुसार, फिलहाल जगदीप धनखड़ के आवेदन की पात्रता जांच की प्रक्रिया जारी है. 

जगदीप धनखड़ का राजनीतिक जीवन लंबा और विविध रहा है. वे 1989 से 1991 तक झुंझुनू से जनता दल के सांसद रहे और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री भी बने. इसके बाद 1993 में वे कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक चुने गए. 2019 से 2022 तक उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में काम किया और फिर 2022 से 2025 तक देश के उपराष्ट्रपति रहे. अब पूर्व विधायक के नाते उन्होंने पेंशन की मांग की है.

राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार मिलती है पेंशन 

राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार, पूर्व विधायकों को उनके कार्यकाल की अवधि के हिसाब से पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं. धनखड़ के मामले में उनके 1993 से 1998 तक के विधायक कार्यकाल को आधार माना जाएगा. अगर उनकी अर्जी मंजूर हो जाती है, तो उन्हें हर महीने करीब 42 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी. 

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इसके अलावा उन्हें चिकित्सा सुविधा, यात्रा भत्ता और कुछ प्रशासनिक फायदे भी मिल सकते हैं. राजस्थान में पूर्व विधायकों को पेंशन के साथ-साथ कई और सुविधाएं भी मिलती हैं. इसमें उनके परिवार के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा, सरकारी काम या विधानसभा से जुड़ी यात्राओं के लिए भत्ता और विधानसभा कार्यक्रमों में भागीदारी जैसी सहूलियतें शामिल हैं.

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