PM Modi की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी का नहीं होगा खुलासा, दिल्ली हाई कोर्ट ने CIC के आदेश को किया रद्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस आदेश को चुनौती दी थी.

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25 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:11 PM )
PM Modi की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी का नहीं होगा खुलासा, दिल्ली हाई कोर्ट ने CIC के आदेश को किया रद्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस आदेश को चुनौती दी थी. बता दें कि CIC ने 2016 में दायर एक RTI याचिका के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था.

'शैक्षणिक रिकॉर्ड और डिग्री का खुलासा करना अनिवार्य नहीं'

दिल्ली हाई कोर्ट के जज सचिन दत्ता के आदेश के मुताबिक, शैक्षणिक रिकॉर्ड और डिग्री का खुलासा अनिवार्य नहीं है. पीएम मोदी के अकादमिक रिकॉर्ड के खुलासे को लेकर यह कानूनी लड़ाई वर्षों से जारी है. सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन दायर करने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को 1978 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दी थी. पीएम मोदी ने भी उसी परीक्षा में सफलता हासिल की थी.

CIC ने दिया था डिग्री सार्वजनिक करने का आदेश

यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से जुड़ी जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए पीएम मोदी की डिग्री संबंधी सूचना देने से इनकार कर दिया था. हालांकि, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने इस तर्क को खारिज करते हुए दिसंबर 2016 में दिल्ली यूनिवर्सिटी को रिकॉर्ड निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. CIC का कहना था कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति, खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित रजिस्टर को सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.

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इसी आदेश को चुनौती देते हुए यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने दलील दी कि ऐसे डेटा का खुलासा खतरनाक मिसाल कायम करेगा, जिससे सरकारी अधिकारियों के कामकाज में बाधा आ सकती है. उनका यह भी कहना था कि कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं.

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