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हरियाणा के किसान उगाएंगे हर्बल फसल, सरकार खुद करेगी पूरी दुनिया में मार्केटिंग

Haryana: किसानों की मदद के लिए हरियाणा सरकार ने “ई-औषधि पोर्टल” भी शुरू किया है. इस पोर्टल पर अब तक 4500 से ज्यादा किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं.

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30 Jan 2026
( Updated: 30 Jan 2026
10:30 AM )
हरियाणा के किसान उगाएंगे हर्बल फसल, सरकार खुद करेगी पूरी दुनिया में मार्केटिंग
Image Source: Social Media

Haryana Hurbal Hub: अब तक गेहूं, धान, बाजरा, गन्ना और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों के लिए पहचाने जाने वाले हरियाणा में खेती की तस्वीर बदलने वाली है. राज्य सरकार किसानों को एक नए रास्ते पर ले जाने की तैयारी कर रही है. बहुत जल्द हरियाणा को सिर्फ अनाज का भंडार नहीं, बल्कि जड़ी-बूटियों और औषधीय खेती के बड़े केंद्र यानी “हर्बल हब” के रूप में भी जाना जा सकता है. मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने अधिकारियों को इस दिशा में ठोस और व्यावहारिक योजना तैयार करने के आदेश दिए हैं.

हर्बल खेती को बनाया जाएगा बड़ा उद्योग

राज्य सरकार का साफ कहना है कि जड़ी-बूटियों की खेती को छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित किया जाएगा. इसका मकसद यह है कि किसानों को गेहूं और धान की खेती से मिलने वाले मुनाफे की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा फायदा मिल सके. सरकार का मानना है कि अगर खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए और सही बाजार मिले, तो हर्बल खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है.

सरकार खुद बिकवाएगी किसानों की फसल

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार किसानों को सिर्फ हर्बल खेती के लिए प्रेरित नहीं करेगी, बल्कि उनकी उगाई हुई फसल को बिकवाने की जिम्मेदारी भी लेगी. यानी किसानों को अब बाजार खोजने या बिचौलियों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी. राज्य सरकार मार्केटिंग में पूरा सहयोग करेगी और इन औषधीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंचाने में भी मदद करेगी, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा मिल सके.

जैसी मिट्टी, वैसी औषधीय फसल

मुख्यमंत्री सैनी ने हर्बल फेडरेशन के अधिकारियों के साथ बैठक में यह साफ निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में क्षेत्रवार मैपिंग की जाए. इसका मतलब है कि हर जिले की मिट्टी की जांच की जाएगी और उसी के अनुसार औषधीय पौधों का चयन किया जाएगा. अब पूरे राज्य में एक जैसी फसल नहीं उगेगी. उदाहरण के तौर पर, रेतीली जमीन में एलोवेरा जैसी फसल उगाई जाएगी, जबकि ज्यादा उपजाऊ जमीन में हल्दी या अन्य पौधे लगाए जाएंगे. इसके लिए किसानों के समूह बनाकर खेती कराई जाएगी, जिससे उत्पादन ज्यादा और लागत कम हो.

दुनिया भर में बढ़ रही है हर्बल उत्पादों की मांग

आज आयुर्वेद और प्राकृतिक इलाज की तरफ लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. यही वजह है कि औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों की मांग सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बढ़ रही है. आने वाले समय में यह बाजार और भी बड़ा होने वाला है. इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार किसानों को अभी से इस खेती के लिए तैयार कर रही है, ताकि भविष्य में उन्हें इसका पूरा लाभ मिल सके.

बिचौलियों से मिलेगी राहत, कंपनियां सीधे करेंगी खरीद

सरकार किसानों के लिए ऐसा मार्केटिंग सिस्टम तैयार कर रही है, जिसमें बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियां और खरीदार सीधे किसानों से संपर्क कर सकें. इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और जो मुनाफा बीच में चला जाता था, वह सीधे किसानों की जेब में पहुंचेगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती एक फायदे का सौदा बनेगी.

इन औषधीय पौधों की होगी खेती

हरियाणा में जिन जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, उनमें हल्दी, आंवला, एलोवेरा, शतावरी, मुलेठी, तुलसी, अश्वगंधा, स्टीविया, हरड़ और बेलपत्र शामिल हैं. ये सभी पौधे आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं. भविष्य में मांग के अनुसार अन्य औषधीय पौधों की खेती भी शुरू की जाएगी. फिलहाल राज्य में करीब 4557 हेक्टेयर जमीन पर जड़ी-बूटियों की खेती हो रही है.

ई-औषधि पोर्टल से जुड़ रहे किसान और कंपनियां

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किसानों की मदद के लिए हरियाणा सरकार ने “ई-औषधि पोर्टल” भी शुरू किया है. इस पोर्टल पर अब तक 4500 से ज्यादा किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं. इतना ही नहीं, 118 आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियां भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं. इस पोर्टल के जरिए किसान और कंपनियां सीधे एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं, जिससे खेती से लेकर बिक्री तक का पूरा सिस्टम आसान और पारदर्शी बन रहा है.

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