देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, समारोह में जगदीप धनखड़ भी रहे मौजूद
एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ लिया. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी इंडिया ब्लॉक के कैंडिडेट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को आसानी से हरा दिया.
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एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ लिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन में उन्हें शपथ दिलाई. राधाकृष्णन ने विपक्ष के कैंडिडेट बी सुदर्शन रेड्डी को हराकर यह पद हासिल किया है. सीपी राधाकृष्णन ने रेड्डी को 152 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के कारण यह पद खाली हुआ था.
उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे
एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को कुल 767 वोटों में से 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट मिले. यह आंकड़ा कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की वजह से विपक्षी खेमे में दरार को दर्शाता है.
#WATCH | C.P. Radhakrishnan takes oath as the 15th Vice President of India. President Droupadi Murmu administers the Oath of Office to him.
(Video Source: DD) pic.twitter.com/I91ezMHd2w— ANI (@ANI) September 12, 2025Advertisement
मतदान के आंकड़े साफ तौर से दर्शाते हैं कि विपक्षी सांसदों द्वारा काफी क्रॉस-वोटिंग की गई. हालांकि, चुनाव से पहले ही तादाद राधाकृष्णन के पक्ष में थी. उपराष्ट्रपति का चुनाव जगदीप धनखड़ ने द्वारा 21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद अस्तित्व में आया. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्होंने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
कौन है सीपी राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत के बाद राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया. राष्ट्रपति मुर्मू ने नई नियुक्ति होने तक गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. कोयंबटूर से दो बार सांसद और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष राधाकृष्णन का दशकों लंबा करियर जनसंघ से शुरू हुआ और फिर बीजेपी में शामिल हो गए.
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उनके इस सफर की शुरुआत छात्र आंदोलन से हुई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव के बाद इसका विस्तार राष्ट्रीय फलक तक हुआ. संघ से सक्रिय राजनीति में आए सीपी राधाकृष्णन ने भाजपा में संगठन में लंबे समय तक काम किया. 2004 से 2007 तक वह तमिलनाडु प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे. इस दौरान 2007 में उन्होंने 93 दिनों में 19,000 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा की. इसका मकसद देश की नदियों को जोड़ना, आतंकवाद का उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता निवारण और मादक पदार्थों के खतरों से निपटना था. 2020 से 2022 तक वह केरल भाजपा के प्रभारी भी रहे. उन्हें संगठन और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है. विनम्र और सुलभ नेता की छवि रखने वाले राधाकृष्णन को उनके समर्थक तमिलनाडु का मोदी कहकर पुकारते हैं.