फ्रांस-इटली में भड़के आंदोलन का भारत से कनेक्शन! सीक्रेट नेटवर्क से जुड़ी चौंकाने वाली रिपोर्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि कई संगठन मिलकर ऐसे संदेश फैला रहे हैं जो कई देशों में एक साथ विरोध भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
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फ्रांस में हुए विरोध प्रदर्शनों का भारत से कनेक्शन होने का दावा किया जा रहा है. अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. इस रिपोर्ट में भारत समेत 9 देशों के 101 संगठनों का जिक्र है. बताया जा रहा है भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध और फ्रांस में विरोध दोनों जुड़े हुए हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि कई संगठन मिलकर ऐसे संदेश फैला रहे हैं जो कई देशों में एक साथ विरोध भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. इनमें से पेरिस में काम कर रहे इंडियन अलायंस पेरिस नाम के संगठन का भी जिक्र है.
रिपोर्ट में इन 5 संगठनों के नाम
- इंडियन अलायंस पेरिस (IAP)
- प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल
- पीपल्स फोरम
- कोडपिंक
- ब्रेकथ्रू न्यूज
दावा है कि कुछ वामपंथी ग्रुप इस तरह के प्रदर्शनों की स्क्रिप्ट तैयार कर रहे हैं. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध भड़काने के लिए एक देश के तरीके (Method), नारों, एजेंडे, को दूसरे देश में अप्लाई किया जा रहा है. इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि एक देश में उस आंदोलन ने कितना असर दिखाया है और क्या नतीजा निकलकर आया है.
दावा है कि इस सिंडिकेट में वामपंथी, समाजवादी संगठन, ट्रेड यूनियनें, छात्र गुट, एडवोकेसी नेटवर्क और कुछ मीडिया संस्थान भी एक्टिव हैं.
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहे हैं. जो कई देशों में एक ही नैरेटिव सेट कर रहे हैं. जो दुनिया में कई देशों में सरकारों के खिलाफ असंतोष भड़काने और विरोध को हवा दे रहे है.
भारत और फ्रांस के बीच विरोध प्रदर्शनों का कनेक्शन
‘इंडियन अलायंस पेरिस’ (IAP) फ्रांस में स्थित छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों का एक संगठन है, जो फ्रांस और भारत के विरोध-प्रदर्शनों के संदेशों को जोड़ने के बीच की कड़ी बन गई है. फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस संगठन ने फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया है. रिपोर्ट में जांच के आधार पर बताया गया कि इस संगठन ने दोनों देशों के युवा प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है. रिपोर्ट में एक और संगठन ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए है.
‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन है, जिसने 16 अक्टूबर की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को एक मंच पर लाने का काम किया. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि क्या ये उभरते हुए विद्रोह एक संगठित राजनीतिक शक्ति का रूप ले सकते हैं, ताकि उन हालात को बदला जा सके जिनकी वजह से ये विद्रोह पैदा हुए हैं. भारत में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में चुनाव आयोग के खिलाफ भी प्रदर्शन शामिल हैं, जहां प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
कौन हैं नेविल रॉय, जिनका रिपोर्ट में है जिक्र
फॉक्स न्यूज़ की जांच में एक नाम जो सबसे ज्यादा हाइलाइट किया गया वो कारोबारी नेविल रॉय हैं. अमेरिका में जन्मे टेक्नोलॉजी उद्यमी नेविल चीन के शंघाई में रहते हैं. उनका कनेक्शन कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों के एक नेटवर्क से जोड़ा गया है.
इस जांच में ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल’ नाम के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट का भी जिक्र है, जिसका नेतृत्व विजय प्रशांत करते हैं. दावा है कि उनके कनेक्शन व्यापक एक्टिविस्ट नेटवर्क के साथ हैं. दरअसल, विजय प्रशांत ने 18 अक्टूबर को ‘X’ पर एक पोस्ट में पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच समानताएं बताईं थीं.. उन्होंने लिखा, “पेरिस-नई दिल्ली-ब्यूनस आयर्स” और आगे जोड़ा, “गुस्से को अपना समय लेने दें, क्योंकि गुस्सा एक ताकत बन सकता है.”
भारत में प्रदर्शनों का विदेशी कनेक्शन!
इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर भारत में भी ऐसे दावे किए गए थे. जिनमें विदेश से फंड मिलने की बात कही गई थी. आरोप है कि ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ नैरेटिव सेट करने के लिए विदेशों से फंड आ रहा है. ये दावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और पूर्व राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने किया था.
महेश जेठमलानी ने इन प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट तौर पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया है. उन्होंने प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया है. महेश जेठमलानी देश के प्रसिद्ध क्रिमिनिल लॉयर दिवंगत राम जेठमलानी के बेटे हैं और राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं. उन्होंने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर यह सनसनीखेज दावा किया.
महेश जेठमलानी ने क्या तर्क दिया?
महेश जेठमलानी ने लिखा, 'कोई गलती मत कीजिए, इन प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों से पैसे मिल रहे हैं. उनके स्थानीय समर्थक इसे अंजाम देने में लगे हुए हैं. क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी विदेशी हित के लिए काम करने से इनकार करते हैं और सिर्फ़ भारत के हितों को आगे बढ़ाते हैं. बस, यही एकमात्र मकसद है और दूसरी वजह, जिसकी वजह से विरोध की आड़ में ऐसी आगज़नी हुई, FCRA बिल, जो जानते हैं, वे जानते हैं.’
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फ्रांस इटली और पुर्तगाल समेत 9 देशों में हिंसा और आगजनी की गई. जहां लाखों लोग सड़कों पर उतरे और महंगाई, स्कूल सुधार समेत कई मुद्दों पर विरोध की आवाज बुलंद की, लेकिन ये विरोध उस समय उग्र हो गए जब प्रदर्शनकारियों ने कई ऐतिहासिक इमारतों को फूंक दिया, स्टोर्स में घुसकर लूटपाट की. हालांकि फ्रांस और इटनी ने इन हिंसक प्रदर्शनों पर सख्त रुख अख्तियार किया और प्रदर्शनकारियों से ही नुकसान की भरपाई करने की चेतावनी दी.