सवाल पूछा तो पत्रकारों से भिड़ गए राहुल गांधी, महिला पत्रकार से बोले- आज यही 'कोड वर्ड' है क्या

संसद के बजट सत्र में सियासी तनाव बढ़ गया है. संसद के बाहर राहुल गांधी एक पत्रकार के सवाल पर नाराज हो गए. पत्रकार ने पूछा था कि क्या सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है. इस पर राहुल ने पत्रकारों पर भड़क गए.

Rahul Gandhi (File Photo)

संसद का बजट सत्र इन दिनों तीखी राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया भाषण और उसके बाद दिए गए बयानों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है. इस बीच सदन के बाहर राहुल गांधी अचानक एक पत्रकार के सवाल पर भड़क गए है और बोला आज का कोड-वर्ड  यही मिला है क्या?

दरअसल, बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में देश के हितों से समझौता हुआ है. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाया गया है और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ा है. अपने भाषण में उन्होंने एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम लिया और सवाल किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

ऑथेंटिकेट शब्द पर क्यों मचा बवाल  

राहुल गांधी के इन आरोपों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों को बिना प्रमाण के सदन में नहीं रखा जा सकता. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे बयानों को 'ऑथेंटिकेट' करना होगा, यानी उन्हें सत्यापित करना जरूरी है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा था कि आरोप लगाने से पहले तथ्यों को प्रमाणित किया जाना चाहिए.

पत्रकारों पर भड़के राहुल गांधी 

इसी 'ऑथेंटिकेट' शब्द ने अगले दिन नई बहस को जन्म दिया. जब राहुल गांधी से संसद के मकर द्वार के बाहर पत्रकारों ने सवाल किया कि सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है, तो वह नाराज हो गए. उन्होंने कहा के महिला पत्रकार से कहा, 'क्या यही कोड-वर्ड आप लोगों को आज दिया गया है. कल यह ‘ऑथेंटिकेट’ था और आज यह ‘प्रिविलेज मोशन’ है.' उन्होंने पत्रकारों से यह भी कहा कि 'थोड़ा अपना काम भी करो भाई.'

क्या है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या होता है. संसद के नियमों के तहत यदि कोई सदस्य सदन को गुमराह करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. सरकार ने पहले संकेत दिए थे कि राहुल गांधी के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया जा सकता है. हालांकि बाद में सरकार ने अपना रुख बदलते हुए कहा कि अब वह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में और सियासी रंग ले सकता है. एक ओर विपक्ष सरकार पर जवाबदेही का दबाव बना रहा है, तो दूसरी ओर सरकार तथ्यों और प्रमाण की मांग कर रही है. इससे संसद का माहौल लगातार गरम बना हुआ है.

बताते चलें कि सत्र आम तौर पर आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का मंच होता है, लेकिन इस बार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसे और भी संवेदनशील बना दिया है. जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आरोपों और जवाबों के इस दौर में सच्चाई किस तरह सामने आती है और संसद की गरिमा किस तरह कायम रखी जाती है. साफ है कि यह विवाद फिलहाल थमने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासत का तापमान और बढ़ सकता है.

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