‘फांसी घर’ विवाद- 6 मार्च को विधानसभा में केजरीवाल की पेशी, लाइव स्ट्रीमिंग की मांग ने बढ़ाई सियासी हलचल!

6 मार्च को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ‘फांसी घर’ मामले में विधानसभा समिति के सामने पेश होंगे. इससे पहले उन्होंने पारदर्शिता के लिए कार्यवाही की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ की मांग की है.

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को पुष्टि की कि वे 'फांसी घर' विवाद के संबंध में 6 मार्च को दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश होंगे. इसके साथ ही उन्होंने पारदर्शिता के लिए कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की. दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने केजरीवाल और उनके पूर्व उपसभापति मनीष सिसोदिया को 'फांसी घर' मुद्दे से जुड़े दावों की प्रामाणिकता के संबंध में 6 मार्च को पेश होने का निर्देश दिया था.

अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?

अपनी उपस्थिति की पुष्टि करते हुए केजरीवाल ने फेसबुक पर लिखा कि दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है. सड़कें टूटी पड़ी हैं. हर जगह कूड़े के ढेर लगे हैं. अस्पतालों में दवाइयों की कमी है. दिल्ली विधानसभा ने मुझे ‘फांसी घर’ के बारे में पूछताछ के लिए तलब किया है. उन्होंने कहा कि मैंने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित किया है कि मैं 6 मार्च को उनके समन के अनुसार उपस्थित रहूंगा. पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए, मैं अनुरोध करता हूं कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए.

केजरीवाल ने समिति को लिखा पत्र

केजरीवाल ने समिति को संबोधित करते हुए अपने पत्र की एक प्रति सोशल मीडिया पोस्ट के साथ संलग्न की. समिति को लिखे अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि उक्त नोटिस के अनुपालन में, मैं 6 मार्च 2026 को दोपहर 3:00 बजे, उसमें उल्लिखित स्थान पर विशेषाधिकार समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहूंगा. मेरी उपस्थिति मेरे कानूनी और संवैधानिक अधिकारों, उपायों, आपत्तियों और दलीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना है, जिन्हें मैंने स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखा है.

क्या है पूरा मामला?

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जन जवाबदेही के हित में, मैं अनुरोध करता हूं कि इस मामले में समिति की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए. कृपया इस सूचना की प्राप्ति की पुष्टि करें. यह विवाद 2021 में आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ था, जब दिल्ली विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष राम निवास गोयल ने दावा किया था कि विधानसभा भवन के नीचे स्थित कक्ष ब्रिटिश शासन के दौरान फांसी घर के रूप में इस्तेमाल होते थे. उन्होंने दावा किया था कि एक भूमिगत सुरंग विधानसभा परिसर को लाल किले से जोड़ती है और संभवतः ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा इसका इस्तेमाल मौत की सजा पाए कैदियों को फांसी के लिए ले जाने के लिए किया जाता था.

मौजूदा दिल्ली सरकार का क्या है दावा?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली मौजूदा भाजपा सरकार ने आम आदमी पार्टी प्रशासन के दौरान किए गए दावे को खारिज कर दिया है. भाजपा सरकार का कहना है कि भूमिगत कक्ष फांसीघर नहीं थे, बल्कि उनमें ब्रिटिश काल में टिफिन ट्रे पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सीढ़ियां मात्र थीं.

Advertisement

यह भी पढ़ें

Advertisement