सड़क पर बदल रही टेक्नोलॉजी - अब ऐसी कारें आ रही हैं जो खुद ब्रेक लगाने, लेन बदलने और बिना ड्राइवर के चलने में सक्षम हैं..
Credit : Canva (Representative Image)
किसके नाम आएगा ई-चालान भारत में मौजूदा व्यवस्था के तहत ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सबसे पहले गाड़ी के रजिस्टर्ड मालिक के नाम चालान जारी होता है.
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कैमरे नहीं देखते कौन चला रहा कार - सड़क पर लगे ANPR कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करते हैं और नियम टूटने पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के आधार पर ई-चालान भेजते हैं.
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क्या कहता है मोटर व्हीकल एक्ट - मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में फिलहाल पूरी तरह ड्राइवरलेस कारों के लिए अलग से कोई विशेष कानूनी व्यवस्था नहीं है.
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सॉफ्टवेयर की गलती तो भी मालिक की जिम्मेदारी- मौजूदा व्यवस्था में शुरुआती तौर पर वाहन मालिक को चालान का सामना करना पड़ सकता है, भले ही गलती तकनीकी सिस्टम की हो.
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कार कंपनी पर भी हो सकती है कार्रवाई - अगर सॉफ्टवेयर या कार में तकनीकी खराबी के सबूत मिलते हैं, तो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत निर्माता के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है.
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ड्राइवरलेस कार का भविष्य और कानूनी चुनौती- टेक्नोलॉजी भले ही तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन भारत में ऐसी कारों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत बनी हुई है..