भारतीय रसोई में बड़ियों का प्रचलन सदियों से चलता आ रहा है.सब्जी और दालों की बड़ियां हमेशा थाली की शान रही हैं, लेकिन बीते काफी समय से सोया बड़ी का चलन बढ़ गया है.
ये सस्ती और प्रोटीन से भरी होती है. सोया बड़ी उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो शाकाहारी होते हैं.
शाकाहारी थाली में हमेशा प्रोटीन की कमी देखी गई है. आयुर्वेद में सोया बड़ी को पौष्टिक आहार की श्रेणी में रखा गया है.
सोयाबीन में 52 फीसदी प्रोटीन है, जो मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करता है और उन्हें अच्छे से बढ़ने में मदद करता है.
सोया बड़ी बनाने के लिए सोयाबीन के बने आटे की जरूरत होती है. पहले सोयाबीन से तेल को अलग किया जाता है और फिर बचे हुए डी-ऑयल्ड सोया फ्लोर को पकाया जाता है.
जिसके बाद स्वादानुसार आटे से छोटी-छोटी बड़ियां बनाई जाती हैं और धूप में सूखाकर लंबे समय तक स्टोर किया जाता है.
सोया बड़ी हार्मोन को संतुलित करने में भी सहायक है. महिलाओं में मासिक धर्म के समय होने वाले हार्मोनल बदलावों में काफी हद तक सोया बड़ी का सेवन लाभकारी होता है.
सोया बड़ी दिल का भी अच्छे से ख्याल रखती है. क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करती है, जिसमें अच्छे वसा होते हैं और संतृप्त वसा कम होती है.
यह हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी सहायक है. सोया बड़ी में वसा का स्तर कम होता है.
अगर वजन अनियंत्रित तरीके से बढ़ रहा है, तब भी भोजन में सोया बड़ी का सेवन किया जा सकता है. जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ज्यादा भूख नहीं लगती.
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