इंजन स्टार्ट में देरी - अगर आपकी कार स्टार्ट होने में ज्यादा समय ले रही है, तो यह बैटरी कमजोर होने का पहला संकेत हो सकता है.धीरे-धीरे क्रैंक होना दिखाता है कि बैटरी पूरी पावर नहीं दे पा रही है.
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बार-बार जंप स्टार्ट की जरूरत - अगर गाड़ी बार-बार बंद होकर जंप स्टार्ट मांग रही है, तो बैटरी कमजोर हो चुकी है. इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है.
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लाइट्स में कमी या झिलमिलाहट - हेडलाइट्स का हल्का होना या डैशबोर्ड लाइट्स का टिमटिमाना बैटरी की कमजोरी दिखाता है. पावर विंडो और अन्य इलेक्ट्रिक फीचर्स भी धीरे काम करने लगते हैं.
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डैशबोर्ड पर बैटरी वार्निंग - अगर डैशबोर्ड पर बैटरी का साइन दिखे, तो इसे हल्के में न लें. यह चार्जिंग सिस्टम या बैटरी दोनों में समस्या का संकेत हो सकता है.
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डैशबोर्ड पर बैटरी वार्निंग - अगर डैशबोर्ड पर बैटरी का साइन दिखे, तो इसे हल्के में न लें. यह चार्जिंग सिस्टम या बैटरी दोनों में समस्या का संकेत हो सकता है.
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बैटरी टर्मिनल पर जंग - अगर बैटरी के कनेक्शन पर सफेद या हरे रंग की परत दिखे, तो यह जंग का संकेत है.इससे करंट फ्लो कमजोर हो जाता है और स्टार्टिंग में दिक्कत आती है.
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बैटरी फूलना या बदबू आना - अगर बैटरी फूली हुई लगे या उससे अजीब गंध आए, तो यह खतरनाक स्थिति है. ऐसी हालत में बैटरी तुरंत बदलवाना ही सुरक्षित विकल्प है.
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3 से 5 साल का लाइफ साइकल - आमतौर पर कार बैटरी 3 से 5 साल तक ठीक चलती है, लेकिन इस्तेमाल पर निर्भर करता है. समय रहते बदलने से अचानक खराब होने की परेशानी से बचा जा सकता है.
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समय पर चेक कराना ही समझदारी - छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करने से बड़ी खराबी हो सकती है. इसलिए नियमित जांच और समय पर बैटरी बदलना सबसे बेहतर उपाय है.